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संग्रह अमीन को राजस्व निरीक्षक पद पर Promotion पर विचार कर 3 माह में DM गोरखपुर को आदेश पारित करने का निर्देश

संग्रह अमीन को राजस्व निरीक्षक पद पर Promotion पर विचार कर 3 माह में DM गोरखपुर को आदेश पारित करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी गोरखपुर को संग्रह अमीन याची की राजस्व निरीक्षक पद पर Promotion तीन माह में विचार कर आदेश पारित करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस विकास बुधवार ने भोला यादव की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता सैयद वाजिद अली ने बहस की. इनका कहना था कि जिलाधिकारी द्वारा बार बार याची के योग्य होने के बावजूद Promotion देने से इंकार करना उसके कानूनी अधिकार का उल्लघंन है.

याची 12 जुलाई 1999 को सीजनल संग्रह अमीन नियुक्त हुआ था. जिसे 5 फरवरी 2005 को संग्रह अमीन पद पर नियमित कर दिया गया.बाद में जिलाधिकारी ने याची सहित 20 संग्रह अमीनो की नियुक्ति निरस्त कर दी. हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर आदेश स्थगित कर दिया गया. कोर्ट ने अमीरुद्दीन केस के फैसले के आलोक में याची के बारे में निर्णय लेने का आदेश दिया. इसके बावजूद जिलाधिकारी ने याची की मांग अस्वीकार कर दी. हाईकोर्ट ने दुबारा निर्णय लेने का निर्देश दिया फिर से याची का दावा जिलाधिकारी ने अस्वीकार कर दिया.

Promotion इसलिए नहीं की गई कि उसकी याचिका लंबित

23 जुलाई 2007 को पारित आदेश को भी चुनौती दी गई. हाईकोर्ट ने स्थगनादेश पारित किया. 8 मई 2009 को याची को संग्रह अमीन पद पर नियुक्त कर दिया गया. 23 अगस्त 2007 को संग्रह अमीन को राजस्व निरीक्षक पद पर Promotion प्रक्रिया शुरू हुई. याची की प्रोन्नति (Promotion) इसलिए नहीं की गई कि उसकी याचिका लंबित है.

जिसके बाद याची ने 27 नवंबर 25 को याचिका वापस ले ली. फिर भी प्रोन्नति (Promotion) नहीं की गई तो यह याचिका दायर की थी. कोर्ट ने जिलाधिकारी को अर्हता रखता हो तो उसकी राजस्व निरीक्षक पद पर प्रोन्नति (Promotion) पर विचार कर आदेश पारित करने का निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी.

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धोखाधड़ी की आरोपी कंपनी निदेशक के पिता की जमानत मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी की आरोपी एक कंपनी के निदेशक के पिता जगजीवन चौहान की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है. यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने दिया है.

गोरखपुर के थाना शाहपुर में  एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता  की धाराओं 319(2), 318(4) और 61(2) के तहत एक कंपनी पर आरोप लगाए गए हैं. कंपनी पर आरोप था कि उसने निवेशकों को 7% वार्षिक ब्याज का लालच देकर निवेश कराया और उस पैसे से निदेशकों ने संपत्तियाँ खरीदीं. आरोपी ने जमानत के लिए अर्जी दायर किया.

तर्क दिया गया कि याची न तो कंपनी का निदेशक है और न ही कर्मचारी.  उसे केवल इसलिए फंसाया गया है,क्योंकि वह कंपनी के एक निदेशक सुनील सिंह का पिता है और कभी-कभी कंपनी जाता था. उसका कोई  आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 17 सितंबर 2025 से जेल में बंद हैं.जिसपर कोर्ट ने जमानत स्वीकार कर ली.

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