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Law की जानकारी न होना उल्लघंन का वैध कारण नहीं, अवैध निरूद्धि (Arrest) रद, तुरंत रिहा करने का निर्देश

Law की जानकारी न होना उल्लघंन का वैध कारण नहीं, अवैध निरूद्धि (Arrest) रद, तुरंत रिहा करने का निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना कारण बताए दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी (Arrest) को अवैध ठहराया है और तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा है कि अज्ञानता कानून के उल्लंघन के लिए वैध बहाना नहीं हो सकती. ऐसी गिरफ्तारी (Arrest) डीजीपी के जुलाई 2025 के सर्कुलर का खुला उल्लंघन है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार (Arrest) व्यक्ति को लिखित में गिरफ्तारी (Arrest) का कारण बताना चाहिए. ऐसा न करना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है. डीजीपी को खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि वे सभी पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी करें और उनका पालन सुनिश्चित कराएं.

खंडपीठ ने राज्य सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया कि मैनपुरी के थानाध्यक्ष को पुलिस महानिदेशक के जुलाई 2025 के उस परिपत्र की जानकारी नहीं थी, जिसमें गिरफ्तारी (Arrest) के नए ज्ञापन का उल्लेख था. कोर्ट ने अनूप कुमार और अभिषेक यादव की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए मैनपुरी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 20 जनवरी 2026 को पारित रिमांड आदेश रद कर दिया.

Arrest के कारण नहीं बताए गए

याचीगण के अधिवक्ता का कहना था कि गिरफ्तारी (Arrest) के कारण नहीं बताए गए थे. एजीए के अनुपालन शपथ पत्र में वर्णित गिरफ्तारी (Arrest) मेमो और गिरफ्तारी (Arrest) के कारण कानून के अनुसार नहीं हैं, जैसा कि हाई कोर्ट ने उमंग रस्तोगी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और तीन अन्य में 22 जनवरी 2026 को पारित आदेश में कहा है.

डीजीपी ने तीन फरवरी को इस अदालत के आदेश के अनुपालन में सर्कुलर जारी किया है, जो सभी पर लागू है. एजीए ने यह बात मानी है कि 25 जुलाई 2025 के डीजीपी के सर्कुलर के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण कोतवाली प्रभारी ने गलती की है. कोर्ट ने कहा, एजीए की दलील उचित नहीं है. याचीगण को तुरंत हिरासत से रिहा करने की आदेश देते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को याचीगण के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्यवाही करने की छूट रहेगी.

कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में दवा व्यापारी की अग्रिम जमानत खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले में कानपुर नगर के दवा कारोबारी वेद प्रकाश शिवहरे की अग्रिम जमानत अर्जी नामंजूर कर दी शिवहरे पर अवैध तरीके के कोडीन युक्त कफ सिरप का कारोबार करने के आरोप में कानपुर के कलेक्टर गंज थाने में मुकदमा दर्ज है. यह आदेश जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने सुनाया है. याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची को गलत तरीके से फंसाया गया है. इस मामले में एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है जबकि मामला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट का है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों की नजीरें भी प्रस्तुत की.
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याची के पास से बड़ी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद हुआ है जिसकी वह गैर पंजीकृत फर्मों को सप्लाई करता था. कोडीन मामले अन्य आरोपियों की ओर प्राथमिकी रद्द करने की याचिका इस न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी हैं.

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