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Bareilly violence की FIR रद करने की मांग हाई कोर्ट ने खारिज की

Bareilly violence की FIR रद करने की मांग हाई कोर्ट ने खारिज की

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली में सितंबर में हुई हिंसा (violence) मामले से जुड़ी प्राथमिकी को रद करने की मांग वाली याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. आरोप है कि पुलिस बल पर भीड़ ने ईंट-पत्थरों, पत्थरों और तेजाब की बोतलों से हमला किया था. जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने इस निर्देश के साथ याचिका निस्तारित कर दी है कि याची अदनान अन्य कानूनी उपायों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है.

कोर्ट में अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, सहायक महाधिवक्ता पारितोष मालवीय ने कहा कि कानून-व्यवस्था लागू करने वाले पुलिस बल पर हमला (violence), किया गया जिसका काम कानून व्यवस्था कायम रखना है. भयभीत करने की कोशिश की गई. खंडपीठ को बताया गया कि मौलाना तौकीर रजा द्वारा सभा का आह्वान करने के बाद पुलिसकर्मियों पर तेजाब की बोतलों, ईंट-पत्थरों और आग्नेयास्त्रों से हमला (violence) किया गया. बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया है.

अभियोजन के अनुसार 26 सितंबर को मौलाना तौकीर रजा ने समुदाय विशेष को इस्लामिया इंटर कॉलेज में इकट्ठा होने का आह्वान किया था. बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद, लगभग 200-250 लोगों की भीड़ मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की ओर बढ़ी. हाथों में तख्तियां लिए और भड़काऊ (violence) नारे लगाते हुए भीड़ ने पुलिसकर्मियों की चेतावनी और समझाने-बुझाने पर ध्यान नहीं दिया.

भीड़ violence हो गई

कुछ ही देर में भीड़ आक्रामक (violence) हो गई. पुलिस पर ईंट-पत्थर और तेजाब की बोतलें फेंकी जाने लगी. पुलिसकर्मियों पर गोलियां भी चलाई गईं. कुछ पुलिसकर्मियों के कपड़े फट गए और दो अधिकारी घायल हो गए. हालात (violence) यहां तक बिगड़े कि पुलिस बल को आत्मरक्षा में गोलियां चलानी पड़ीं.

राज्य सरकार का कहना था कि यदि ऐसे मामलों (violence) में कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं हुई तो इससे सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है. प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध का पता चलता है.

हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल और निहारिका इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि इस स्तर पर कोई भी अंतरिम राहत जांच में बाधा डाल सकती है. याची की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अंसार अहमद ने कहा कि अब याची प्राथमिकी रद करने के लिए राहत पर जोर नहीं देना चाहता. परिणामस्वरूप, प्राथमिकी रद्द करने के लिए मांगी गई राहत अस्वीकार कर दी गई.

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