+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

1988 के SP के जज को थाने घसीटने की धमकी’ की फाइल खुली

इलाहाबाद HC ने SP के ठिकाने और कार्रवाई की जानकारी मांगी

1988 के SP के जज को थाने घसीटने की धमकी' की फाइल खुली

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 37 साल पुराने मामले को फिर से उठाया जिसमें एक पूर्व सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) पर आरोप है कि उसने केस की सुनवाई के दौरान एक मौजूदा सेशंस जज को पुलिस स्टेशन घसीटने की धमकी दी थी. दशकों पुराने फैसले में पीठासीन अधिकारी द्वारा दर्ज की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को एक पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें अधिकारी (SP) की मौजूदा स्थिति और उसके खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण हो.

यह आदेश पिछले हफ्ते आरोपी द्वारा अपनी सजा को चुनौती देने वाली क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान पारित किया गया था. तत्कालीन ललितपुर के सेशंस जज, एलएन राय द्वारा दिए गए दोषसिद्धि के फैसले 30 अप्रैल, 1988 की जांच करते हुए हाईकोर्ट का ध्यान पैराग्राफ 190 और 191 पर गया. बेंच ने नोट किया कि इन पैराग्राफ में ललितपुर के तत्कालीन सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP), बीके भोला के खिलाफ बहुत गंभीर टिप्पणियां थीं.

SP में इतनी हिम्मत और दुस्साहस था कि उसने ट्रायल जज को धमकी दी

हाईकोर्ट ने कहा, टिप्पणियां इस हद तक जाती हैं कि बीके भोला, सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) ललितपुर में इतनी हिम्मत और दुस्साहस था कि उसने विद्वान ट्रायल जज को धमकी दी कि अगर उन्होंने पुलिस से कुछ रिकॉर्ड कुछ वायरलेस संदेश मंगवाए या एसपी को बचाव पक्ष के गवाह के रूप में पेश होने के लिए मजबूर किया तो वह उन्हें पुलिस स्टेशन घसीट ले जाएगा.

कोर्ट ने नोट किया कि हालांकि ट्रायल जज ने उस समय अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की थी लेकिन वह आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए इस कोर्ट में रेफरेंस न करके दयालुता दिखायी थी.

लगभग चार दशक बाद इस मुद्दे को फिर से खोलते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि SP के आचरण को केवल समय बीत जाने के कारण नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. बेंच ने पाया कि सेशंस जज ने पाया था कि डिस्ट्रिक्ट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने एक गुंडे की तरह व्यवहार किया और ट्रायल जज को धमकी दी.

कोर्ट ने डीजीपी, उत्तर प्रदेश को 9 दिसंबर 2025 तक एक एफिडेविट फाइल करने का सख्त निर्देश दिया है जिसमें इन पॉइंट्स को शामिल किया जाए कि क्या SP बीके भोला अभी भी हैं या नहीं. क्या SP अभी भी सर्विस में हैं या पेंशन ले रहे हैं. अगर जिंदा हैं तो उनकी पूरी जानकारी रहने का पता और पुलिस स्टेशन. सबसे जरूरी बात डीजीपी को बेंच को यह भी बताने का निर्देश दिया गया है कि 1988 के फैसले में ट्रायल जज के निर्देशों के आधार पर बीके भोला के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई थी.

कोर्ट ने यह भी देखा कि फैसले में कुछ अन्य अधिकारियों के नाम भी हैं, लेकिन वे मामूली अधिकारी हैं. बेंच ने टिप्पणी की कि उनके बर्ताव की जांच करना किसी और दिन का मामला होगा क्योंकि माननीय सेशंस जज ने पाया था कि डिस्ट्रिक्ट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने एक गुंडे की तरह बर्ताव किया और ट्रायल जज को धमकी दी. मामले की सुनवाई 9 दिसंबर को होगी.

इसे भी पढ़ें….

One thought on “1988 के SP के जज को थाने घसीटने की धमकी’ की फाइल खुली

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *