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2026 में Intercaste Marriage करने वाला जोड़ा साथ रहने के लिए आजाद, किसी को उनकी शांतिपूर्ण जिंदगी में दखल देने की इजाजत नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि Intercaste Marriage करने वाला बालिग जोड़ा अपनी मर्जी से साथ रहने (Relation) के लिए आजाद है. उनकी शांतिपूर्ण Marriage life में दखल देने का अधिकार किसी को नहीं है. इसके साथ ही जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि पिटीशनर्स की शांतिपूर्ण Marriage life में कोई दिक्कत होती है तो पिटीशनर्स इस ऑर्डर की एक कॉपी के साथ संबंधित सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस या सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के पास जाएँगे, जो मामले की जाँच करेंगे और पिटीशनर्स को तुरंत सुरक्षा देंगे. पुलिस अथॉरिटी यह भी पक्का करेगी कि किसी बेगुनाह व्यक्ति को परेशान या बेइज्जत न किया जाए.

2026 में Intercaste Marriage करने वाला जोड़ा साथ रहने के लिए आजाद, किसी को उनकी शांतिपूर्ण जिंदगी में दखल देने की इजाजत नहीं

वर्तमान रिट याचिका राधिका यादव और अन्य की ओर से शांतिपूर्ण Marriage life में हस्तक्षेप न करने और सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश देने की प्रार्थना के साथ दायर की गयी थी. याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता बालिग हैं और उन्होंने 09.02.2026 को रीति-रिवाजों के अनुसार शादी (Marriage) की है.

यह उनकी पहली शादी (Marriage) है. इसके संबंध में उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और उनकी Marriage किसी भी पक्ष पर दबाव के बिना उनकी स्वतंत्र सहमति से हुई थी. आरोप लगाया कि इस प्रकार Marriage करने के कारण याचिकाकर्ताओं को प्रतिवादियों द्वारा धमकाया और परेशान किया जा रहा है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किये गये लता सिंह बनाम स्टेट आफ यूपी 2006 Cr.L.J. 3309 का हवाला दिया गया. इसमें इंटर-कास्ट मैरिज (Marriage) करने वाले लड़के और लड़की के माता-पिता द्वारा परेशान किए जाने के एक मामले से निपटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में एडमिनिस्ट्रेशन/पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे:-

“यह एक आजाद और डेमोक्रेटिक देश है. एक बार जब कोई व्यक्ति बालिग हो जाता है तो वह जिससे चाहे शादी कर सकता है. अगर लड़के या लड़की के माता-पिता ऐसी इंटर-कास्ट या इंटर-रिलीजियस शादी (Marriage) को मंजूरी नहीं देते हैं तो वे ज्यादा से ज्यादा बेटे या बेटी से सोशल रिश्ते (Relation) खत्म कर सकते हैं, लेकिन वे धमकी नहीं दे सकते या हिंसा नहीं कर सकते, भड़का नहीं सकते और ऐसी इंटर-कास्ट या इंटर-रिलीजियस शादी (Marriage) करने वाले व्यक्ति को परेशान नहीं कर सकते.

बालिग इंटर-कास्ट या इंटर-रिलीजियस Marriage करता है, तो उस जोड़े को कोई उन्हें धमकी न दे

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पूरे देश में एडमिनिस्ट्रेशन/पुलिस अधिकारी यह देखेंगे कि अगर कोई लड़का या लड़की जो बालिग है, किसी बालिग महिला या पुरुष से इंटर-कास्ट या इंटर-रिलीजियस शादी (Marriage) करता है, तो उस जोड़े को कोई भी परेशान न करे और न ही उन्हें धमकी दे या हिंसा का सामना करना पड़े.

जो कोई भी ऐसी धमकी देता है या परेशान करता है, या खुद या किसी के उकसाने पर हिंसा करता है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस क्रिमिनल केस चलाकर कार्रवाई करती है और कानून के हिसाब से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है.”

भगवान दास बनाम राज्य (NCT दिल्ली), (2011) 6 SCC 396 में सुप्रीम कोर्ट ने पैराग्राफ 28 और 29 में यह कहा:-

“28. …अक्सर प्यार में पड़ने वाले युवा जोड़ों को कंगारू कोर्ट के गुस्से से बचने के लिए पुलिस लाइन या प्रोटेक्शन होम में शरण लेनी पड़ती है. हमने लता सिंह केस में माना है कि “ऑनर” किलिंग में कुछ भी “ऑनरेबल” नहीं है. वे सामंती सोच वाले कट्टर लोगों द्वारा की गई बर्बर और बेरहम हत्याओं के अलावा कुछ नहीं हैं. अब इन बर्बर, सामंती प्रथाओं को खत्म करने का समय आ गया है जो हमारे देश पर एक कलंक हैं. इस तरह के अपमानजनक, असभ्य व्यवहार को रोकने के लिए यह जरूरी है. सभी लोग जो “ऑनर” किलिंग करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि फांसी उनका इंतजार कर रही है.

29. इस फैसले की एक कॉपी सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल/रजिस्ट्रार को भेजा जाएगा, जो इसे कोर्ट के सभी जजों को भेजेंगे. हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल/रजिस्ट्रार इसकी कॉपी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी सेशन जजों/एडिशनल सेशन जजों को भी भेजेंगे. फैसले की कॉपी देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी चीफ सेक्रेटरी/होम सेक्रेटरी/डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को भी भेजी जाएंगी. होम सेक्रेटरी और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस इसे जानकारी के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी SSP/SP को भेजेंगे.

कोर्ट में स्टेट का पक्ष रखते हुए स्टैंडिंग काउंसिल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की ऊपर कही गई बातें और निर्देश यूपी राज्य में लागू किए जा रहे हैं और इस समय इस कोर्ट को कोई और निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पिटीशनर्स को बस यह डर है कि प्राइवेट रेस्पोंडेंट कोई हिंसा कर सकते हैं या परेशान कर सकते हैं.

बेंच ने कहा कि, कोर्ट मामले के फैक्ट्स और हालात को देखते हुए, लेकिन मामले के मेरिट पर कोई असर डाले बिना, रिट पिटीशन को इस निर्देश के साथ आखिरकार निपटाया जाता है कि पिटीशनर्स शादीशुदा (Marriage) जोड़े के तौर पर साथ रहने के लिए आजाद हैं और किसी भी व्यक्ति को उनकी शांतिपूर्ण जिंदगी में दखल देने की इजाजत नहीं दी जाएगी. पिटीशनर्स की शांतिपूर्ण जीवन याप में कोई दिक्कत होती है तो पिटीशनर्स इस ऑर्डर की एक कॉपी के साथ संबंधित सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस या सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के पास जाएँगे, जो मामले की जाँच करेंगे और पिटीशनर्स को तुरंत सुरक्षा देंगे.

कोर्ट ने पिटीशनर्स को निर्देश दिया है कि 09.02.2026 की शादी (Marriage) आज से दो महीने के अंदर यूपी Marriage  रजिस्ट्रेशन रूल्स, 2017 के नियमों के अनुसार रजिस्टर करवाएं. तय समय के भीतर ऐसा न करने पर उन्हें यहां दी गई सुरक्षा खत्म हो जाएगी. यह साफ किया जाता है कि इस कोर्ट ने शादी (Marriage) की वैलिडिटी और/या पिटीशनर्स द्वारा क्लेम किए गए उनके Marriage सर्टिफिकेट की असलियत या पिटीशनर्स की सही उम्र पर फैसला नहीं सुनाया है. यह भी साफ किया जाता है कि यह ऑर्डर पिटीशनर्स को कानून के अनुसार शुरू की गई किसी भी कार्रवाई या प्रोसिडिंग्स से बचाने के लिए पास नहीं किया गया है.
बेंच ने कहा

 बेंच ने कहा कि चूंकि पिटीशन का निपटारा लिमिट में किया जा रहा है, इसलिए इससे परेशान कोई भी व्यक्ति इसे वापस लेने के लिए अप्लाई करने के लिए आजाद है, अगर ऑर्डर फैक्ट्स को दबाकर या गलत बातों पर हासिल किया गया है. यह ऑर्डर पुलिस अधिकारियों के सामने पेंडिंग किसी भी जांच में रुकावट नहीं डालेगा.

WRIT – C No. – 6322 of 2026 Radhika Yadav And Another Versus State Of U.P. And 3 Others

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