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पार्षद Election निरस्त कर दूसरे प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित करने के आदेश पर रोक, 15 दिसंबर तक मांगा जवाब

पार्षद Election निरस्त कर दूसरे प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित करने के आदेश पर रोक, 15 दिसंबर तक मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद के वार्ड 69 की पार्षद रुबी परवीन के निर्वाचन (Election) को रद्द करने के आदेश पर  रोक लगा दी है. साथ ही प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है. यह आदेश चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने रुबी परवीन की अपील पर दिया है.

पार्षद के खिलाफ सपा समर्थित प्रत्याशी अर्शी ने चुनाव याचिका एडीजे मुरादाबाद अदालत  में दायर की. मतदाता सूची में रूबी परवीन का नाम न होने के आधार पर उनके निर्वाचन (Election) को रद्द कर दिया था. इसके साथ चुनाव में दूसरे स्थान पर रही अर्शी को विजयी घोषित कर दिया. इस फैसले को  हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

 सपा उम्मीदवार का दावा था कि अपीलकर्ता का नाम नगर निगम की मतदाता सूची में नहीं था और इस कारण वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य थीं. इसके विपरीत तथ्य यह था की अपीलकर्ता का नाम मतदाता सूची के क्रम संख्या 1151 पर मौजूद था लेकिन उनके पिता का नाम अख्तर खान गलत दर्ज था. संशोधित मतदाता सूची में पिता का नाम अफसर अली दर्शाया गया था.

अर्शी को निर्वाचित (Election) घोषित करके गलती की गई

अदालत ने इस पर ध्यान नहीं दिया. कोर्ट ने कहा अर्शी को निर्वाचित (Election) घोषित करके गलती की गई क्योंकि जहां कई प्रत्याशी होते हैं, वहां निर्वाचित  को अयोग्य पाए जाने पर भी ऐसा ऐलान नहीं किया जा सकता.

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मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह विवाद में सुनवाई 12 दिसंबर को

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को लेकर लंबित मुकदमों में अगली सुनवाई के लिए 12 दिसंबर की तारीख लगाई है. जस्टिस अवनीश सक्सेना ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान दस्तावेजों की जांच करते हुए उन मामलों में लिखित बयान दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया जिनमें बयान दाखिल नहीं किया गया है.

इसके अलावा सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल संशोधन अर्जी सुनवाई हुई. माता रुक्मिणी देवी की वंशज नीतू चौहान की ओर से प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल किया गया. इससे पहले गत 16 अक्टूबर को कोर्ट ने कहा था कि रेकॉर्ड बहुत बड़ा है. मुकदमे के पक्षकार सभी लंबित आवेदनों में आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं ताकि आवेदनों का जल्द से जल्द निर्णय किया जा सके. कोर्ट ने कार्यालय को निर्देश दिया कि फाइल को सामान्य नियम सिविल के अनुसार पुनर्व्यवस्थित करे और उसी के अनुसार संख्या दे.

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