Dowry Death का शिकायतकर्ता ही बयान से मुकरा, आरोपित को जमानत, 20 हजार का मुचलका भरना होगा

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने दहेज हत्या (Dowry Death) के केस में आरोपी ससुर को यह देखते हुए जमानत दी कि दहेज की मांग के फर्जी केस बढ़ रहे हैं. जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच ने यह राहत तब दी जब शिकायतकर्ता (मृतक का भाई), जिसने पहले आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, ट्रायल के दौरान अपने बयान से मुकर गया. यह देखते हुए कि आरोपी 17 मार्च 2025 से हिरासत में था, और सरकारी वकील के गवाहों ने आरोपों का समर्थन नहीं किया, हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर कर ली.
यह मामला जनवरी 2024 में शाहिदा बानो की शादी के दो साल के अंदर मौत से जुड़ा है. वह अपने ससुराल में संदिग्ध हालात में मृत पायी गयी थी. उसकी बॉडी दुपट्टा से सहारे सीलिंग फैन से लटकती हुई पायी गयी थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत से पहले जबरदस्ती गला घोंटने का तथ्य सामने आया था.
इसके बाद मृतका के पति और ससुराल वालों के खिलाफ 304B और 498A आईपीसी के साथ दहेज रोकथाम अधिनियम के तहत (Dowry Death) केस दर्ज कराया गया था. पुलिस ने Dowry Death की एफआईआर मृतका के भाई की सूचना पर दर्ज की थी. पुलिस ने इस मामले में आरोपितों को गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया. संयोग से मृतका के सास और ससुर ने जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी लगायी और उनकी जमानत मंजूर कर ली गयी.
Dowry Death की एफआईआर मृतका के भाई की सूचना पर दर्ज की
सास और ससुर को जमानत दिये जाने के खिलाफ मृतका के भाई ने कोर्ट में लड़ाई लड़ी. उसने सुप्रीम कोर्ट तक में जमानत मंजूर किये जाने को चैलेंज किया. 3 मार्च, 2025 को इस पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई की और मेडिकल एवीडेंस को परखा जिसमें मौत से पहले गला घोंटने की वजह से दम घुटने और मृतक को गंभीर चोटें दिखाई गईं. इसके बाद जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कमेंट किया:
“जब शादी के सिर्फ दो साल के अंदर एक नई दुल्हन की संदिग्ध हालात में मौत हो जाती है तो न्यायिक आदेशों से मिलने वाले सामाजिक संदेश को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया जा सकता. महंगे तोहफों की मांग से लेकर बुरी तरह चोटें पहुंचाने तक के आरोपों की गंभीरता, उनके खिलाफ एक मजबूत पहली नजर में मामला दिखाती है”.
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुख्तार अहमद (ससुर) को सरेंडर करने का निर्देश दिया था और कहा था कि Dowry Death के मुख्य आरोपितों के जमानत पर रहने देने से न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा कम होगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कि Dowry Death के आरोपी ने सरेंडर कर दिया और ट्रायल शुरू हुआ.
इस मामले में यूटर्न तब आया जब कि Dowry Death की सूचना देने वाले को होस्टाइल घोषित कर दिया गया. अपने बयान में कहा कि उसने कहा कि आरोप कि (Dowry Death) समाज के लोगों के कहने पर लगाए गए और जांच (पंचनामा) के समय, उसने कहा था कि पीड़ित ने आत्महत्या की थी.
इस घटनाक्रम को देखते हुए आवेदक (ससुर) ने मौजूदा दूसरी जमानत याचिका दायर की. जस्टिस पंकज भाटिया ने मृतका के पिता के बयान पर गौर किया तो वह भी प्रॉसिक्यूशन का समर्थन करने वाला नहीं था. अपने बयान में उन्होंने कहा कि उसकी बेटी को न तो दहेज के लिए परेशान किया गया और न ही उसे मारा (Dowry Death) गया.
इंट्रेस्टिंग फैक्ट यह था कि मृतक के मामा और बड़ी बहन सहित दूसरे रिश्तेदारों को भी होस्टाइल घोषित कर दिया गया. इसे जस्टिस भाटिया ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया. मौजूदा हालात को सुप्रीम कोर्ट के सामने मौजूद हालात से अलग करते हुए हाईकोर्ट ने कहा:
“इन बयानों को देखते हुए यह ध्यान देना जरूरी है कि दहेज मांगने के नकली मामले बढ़ रहे हैं, जैसा कि मौजूदा मामले से साफ है, जहां शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने जमानत देने के आदेश को चुनौती दी और उसके बाद अपने बयानों से मुकर गया और सरकारी वकील के बयान का समर्थन नहीं किया, इस बात को यह कोर्ट नजरअंदाज नहीं कर सकता.शिकायतकर्ता का व्यवहार समाज की कड़वी सच्चाई दिखाता है. “
Case title – Mukhtar Ahmad vs. State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Home Lko
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