+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

चार्जशीट और कॉग्निजेंस Record पर नहीं तो 528 BNSS का हवाला देकर नहीं रद की जा सकती एफआईआर

चार्जशीट और कॉग्निजेंस Record पर नहीं तो 528 BNSS का हवाला देकर नहीं रद की जा सकती एफआईआर

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि अगर चार्जशीट और कॉग्निजेंस Record पर नहीं रखे गए हैं तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 का हवाला देकर फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट को रद्द नहीं किया जा सकता. कोर्ट बीएनएसएस की धारा 528 के तहत दायर एप्लीकेशन पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी.

कोर्ट ने एप्लीकेशन को खारिज कर दिया. जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रज्ञा प्रांजल कुलकर्णी (सुप्रा) के फैसले को देखते हुए चूंकि चार्जशीट और कॉग्निजेंस Record पर नहीं रखे गए हैं इसलिए धारा 528 बीएनएसएस (पुरानी धारा 482 सीआरपीसी) के प्रावधानों का हवाला देकर एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता.

उपरोक्त को देखते हुए, यह एप्लीकेशन सुनवाई योग्य नहीं है. एप्लीकेंट की ओर से एडवोकेट आलोक सक्सेना और विरोधी पार्टियों की ओर से एजीए बीपी सिंह और एडवोकेट सुनील कुमार मिश्रा पेश हुए.

एप्लीकेंट के वकील ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग है क्योंकि इसी तरह के तथ्यों पर पहले 2022 में चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी. यह भी कहा गया कि उस मामले में चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी है और मजिस्ट्रेट ने चार्जशीट में बताए गए अपराधों का संज्ञान भी ले लिया है.

एफआईआर के साथ Record पर रखा गया

हाई कोर्ट ने कहा कि कहा सुप्रीम कोर्ट ने प्रज्ञा प्रांजल कुलकर्णी (सुप्रा) मामले में साफ तौर पर कहा है कि FIR को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है.

अगर चार्जशीट जमा कर दी गई है और संज्ञान ले लिया गया है और उसे एफआईआर के साथ Record पर रखा गया है तो इसे सेक्शन 528 बीएनएसएस (पुराना सेक्शन 482 CrPC) का इस्तेमाल करके रद्द किया जा सकता है.

कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि आवेदक ने सिर्फ एफआईआर को रद्द करने की मांग की है और उसने चार्जशीट के साथ-साथ सक्षम कोर्ट द्वारा चार्जशीट पर लिए गए संज्ञान को भी पेश नहीं किया है. कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि चूंकि आवेदन स्वीकार करने लायक नहीं है, इसलिए कोर्ट मामले की मेरिट पर विचार नहीं कर सकता. हाई कोर्ट ने आवेदन खारिज कर दिया.

इसे भी पढ़ें…

हाईकोर्ट ने लिया अपना आदेश वापस, अंतरिक्ष ग्रीन अपार्टमेंट एसोसिएशन का खाता रहेगा सीज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिक्ष ग्रीन अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन कौशांबी गाजियाबाद का बैंक खाता सीज करने व पदाधिकारियों की सूची मांगने के बैंक अधिकारी के आदेश को रद करने के अपने 17सितंबर 24के आदेश को वापस ले लिया है. यह आदेश जस्टिस मनीष कुमार ने एसोसिएशन व अन्य की याचिका पर दाखिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सरस त्रिपाठी की अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है. अर्जी पर अधिवक्ता कुंजेश कुमार दूबे ने बहस की.

कोर्ट ने कहा आदेश वापस लेने की अर्जी पर याची एसोसिएशन के सचिव अधिवक्ता ने कोई आपत्ति दाखिल नहीं की और न केस सुनवाई टालने का अनुरोध किया. अर्जी में स्पष्ट किया है कि उप निबंधक ने सूचित किया है कि एसोसिएशन के सचिव के हस्ताक्षर सत्यापित नहीं किया है और न ही ऐसा दस्तावेज पेश किया गया.

याची एसोसिएशन के सचिव के अधिवक्ता ने कहा था कि उसके हस्ताक्षर सत्यापित किया गया है और नई प्रबंध समिति का चुनाव अभी नहीं हुआ है. उप निबंधक ने बैंक को कोई आदेश नहीं दिया है. इसके बावजूद यूनियन बैंक आफ इंडिया कौशांबी के प्रबंधक ने एसोसिएशन का खाता सीज करने का आदेश दिया. जिस पर कोर्ट ने बैंक आदेश रद कर दिया था अब इसे वापस ले लिया है.

One thought on “चार्जशीट और कॉग्निजेंस Record पर नहीं तो 528 BNSS का हवाला देकर नहीं रद की जा सकती एफआईआर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *