+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

Caste Certificate मां की जाति से भी बच्चों को जारी किया जा सकता है

चीफ जस्टिस आफ इंडिया की बेंच ने दिया लैंडमार्क जजमेंट, Caste Certificate जारी करने का निर्देश

मां की जाति से भी बच्चों को जारी किया जा सकता है Caste Certificate

सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बच्ची के हितों को सर्वोपरि मानते हुए मां की जाति के आधार पर Caste Certificate (एससी प्रमाणपत्र) जारी करने की अनुमति दे दी है. चीफ जस्टिस आफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह व्यवस्था देते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जाति निर्धारण से जुड़े बड़े कानूनी सवालों पर अंतिम फैसला बाद में किया जाएगा.

इस केस की सुनवाई के दौरान 2012 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा ‘रमेशभाई दबाई नाइका बनाम गुजरात सरकार’ मामले में दिये गये फैसले पर भी बात हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अंतरजातीय विवाह या आदिवासी और गैर-आदिवासी विवाह से जन्मे बच्चे की जाति का निर्धारण केवल पिता की जाति के आधार पर यांत्रिक तरीके से नहीं किया जा सकता.

उस फैसले में यह भी कहा गया था कि ऐसे मामलों में यह अनुमान जरूर लगाया जा सकता है कि बच्चा पिता की जाति (Caste) से जुड़ा होगा लेकिन यह अनुमान अंतिम और अटल नहीं है.

बच्चा यह साबित कर दे कि उसका पालन-पोषण अनुसूचित जाति (Caste) या जनजाति से जुड़ी मां के सामाजिक परिवेश में हुआ है

सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले में यह भी साफ किया था कि अगर बच्चा यह साबित कर दे कि उसका पालन-पोषण अनुसूचित जाति या जनजाति से जुड़ी मां के सामाजिक परिवेश में हुआ है और उसे जीवन में वही सामाजिक भेदभाव और अपमान झेलना पड़ा है जो उस समुदाय के अन्य लोगों को झेलना पड़ता है तो उसे उस समुदाय से संबंधित माना जा सकता है.

यह मामला बेसिकली पुडुचेरी का है. यहां की रहने वाली महिला ने अपने क्षेत्र के तहसीलदार के पास आवेदन देकर अपने तीन बच्चों दो बेटियों और एक बेटे के लिए मां की जाति (Caste) के आधार पर अनुसूचित जाति (Caste Certificate) प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की थी. महिला ने अपने आवेदन में कहा था कि उसके माता-पिता और दादा-दादी सभी हिंदू आदि द्रविड़ समुदाय से संबंध रखते हैं.

उसने यह भी बताया कि शादी के बाद उसका पति उसके मायके में ही रहता रहा है. तहसीलदार ने सर्टिफिकेट जारी करने से यह कहते हुए मना कर दिया कि पिता एससी जाति (Caste) का नहीं है तो उसकी बच्चियों को एससी (Caste) श्रेणी का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा सकता.

इसके बाद मां को किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिली तो उसने बेटियों को एससी (Caste) श्रेणी का सर्टिफिकेट जारी करने के लिए मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. बच्चियों के लिए एससी (Caste) श्रेणी का सर्टिफिकेट जारी करने में अड़चन था 5 मार्च 1964 और 17 फरवरी 2002 को जारी राष्ट्रपति अधिसूचना और गृह मंत्रालय के निर्देश, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यक्ति की जाति (Caste) का निर्धारण मुख्य रूप से पिता की जाति और उसके निवास स्थान के आधार पर किया जाता रहा है.

सुनवाई के दौरान 2003 में सुप्रीम कोर्ट से निर्णित ‘पुनित राय बनाम दिनेश चौधरी’ केस का हवाला दिया गया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरक्षण से जुड़े मामलों में जाति निर्धारण का निर्णायक आधार पिता (Caste) की जाति होगी और परंपरागत हिंदू कानून के तहत संतान पिता से ही अपनी जाति प्राप्त करती है न कि मां से.

इसे भी पढ़ें…

One thought on “Caste Certificate मां की जाति से भी बच्चों को जारी किया जा सकता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *