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BSA ने Transfer आदेश की व्याख्या में की चूक, याची समेत 4 टीचर्स को राहत

बीएसए और एबीएसए हरदोई के Transfer आदेश पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से जवाब तलब

BSA ने Transfer आदेश की व्याख्या में की चूक, टीचर्स को राहत

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने महत्वपूर्ण फैसले में Transfer आदेश की व्याख्या में की चूक पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरदोई द्वारा दिये गये आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय देते हुए निर्देश दिया है कि इस मामले को दिसंबर के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाय. कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक 8.10.2025 और 6.10.2025 को पारित आदेश स्थगित रहेंगे.

याचिकाकर्ता प्रभात कुमार सिंह और चार अन्य हरदोई में बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक के पद पर तैनात हैं. उनकी तरफ से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा दिये गये 6 अक्टूबर 25 के आदेश और एबीएसए द्वारा पारित 8 अक्टूबर 2025 के Transfer आदेश को चुनौती दी गयी है. इन आदेशों के तहत याचिकाकर्ताओं को उनके तैनाती स्थान पर वापस भेज दिया गया था, जहां से उन्हें शासनादेश दिनांक 16.6.2025 के अनुसरण में स्थानांतरित (Transfer) किया गया था.

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता द्वारा बताया गया कि 16 जून 2025 को एक पॉलिसी लागू की गयी है. बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक अध्यापकों के अंतर-जनपदीय स्थानांतरण हेतु शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 (जिसे आगे नियम 2011 कहा जाएगा) के तहत अधिसूचना जारी की गई थी. उसके बाद परिपत्र दिनांक 26.6.2025 के माध्यम से 28.6.2025 से 30.6.2025 की अवधि के दौरान अध्यापकों के स्वैच्छिक स्थानांतरण (Transfer) को प्रभावी करने के लिए अनुसूची प्रदान की गई थी.

इसके बाद परिपत्र के अनुसार याचिकाकर्ताओं को उनके पिछले विद्यालयों से कार्यमुक्त कर दिया गया था और उन्हें उनके संबंधित तैनाती स्थल पर भेज दिया गया था. वे पिछले साढ़े तीन महीने से अधिक समय से अपने स्थानांतरित (Transfer) तैनाती स्थल पर काम कर रहे हैं और वेतन प्राप्त कर रहे हैं.

उन्होंने तर्क दिया कि 22.7.2025 के परिपत्र द्वारा 30.6.2025 को स्वैच्छिक स्थानांतरण (Transfer) कार्यवाही के पहले दौर के बाद उन शिक्षकों के स्वैच्छिक स्थानांतरण (Transfer) और समायोजन के दूसरे दौर में जिन्होंने पहले विकल्प नहीं चुना था या आवेदन नहीं किया था, को अवसर दिया गया था.

दूसरे दौर के Transfer के संबंध में प्रतिवादी संख्या 2 द्वारा स्पष्टीकरण आदेश जारी किया गया था

शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के लिए दूसरे दौर के स्थानांतरण (Transfer) के संबंध में प्रतिवादी संख्या 2 द्वारा स्पष्टीकरण आदेश जारी किया गया था. उन्होंने कहा कि 22 जुलाई 2025 और 8 अगस्त 2025 के आदेश दूसरे दौर में शिक्षकों के स्वैच्छिक स्थानांतरण (Transfer) और समायोजन से संबंधित हैं. इसमें स्थानांतरण (Transfer) शामिल नहीं है. उसे पहले ही पहले दौर के परिपत्र के आधार पर प्रभावी किया जा चुका है.

उन्होंने कोर्ट का ध्यान 22 जुलाई 2025 के परिपत्र की ओर आकर्षित किया है, जो अपने आप में स्पष्ट है कि स्थानांतरण (Transfer) कार्यवाही का पहला दौर 30.6.2025 को पूरा हो गया है. कहा कि वास्तव में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 8 अगस्त 2025 के परिपत्र की गलत व्याख्या की है. यह वर्तमान याचिकाकर्ताओं के मामले में लागू नहीं होता.

उन्होंने कहा कि जहां तक याचिकाकर्ताओं में से एक प्रभात कुमार सिंह का संबंध है, चार्ट से ही स्पष्ट है कि उन्हें नई तैनाती के स्थान से पिछली तैनाती के स्थान पर स्थानांतरित (Transfer) किया जा रहा है जहां एक से अधिक शिक्षक होंगे तो उक्त विद्यालय एकमात्र शिक्षक के पास नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि वास्तव में यह विसंगति 8 अगस्त 2025 के परिपत्र की गलत व्याख्या के कारण उत्पन्न हुई और इसलिए 6 अक्टूबर 2025 और 8 अक्टूबर 2025 के आदेश कानून की नजर में त्रुटिपूर्ण और टिकने योग्य नहीं हैं.

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के वकील बेसिक शिक्षा परिषद ने उपरोक्त तर्क का विरोध किया है, लेकिन वह याचिकाकर्ताओं के विद्वान वकील के इस तर्क का खंडन करने में विफल रहा है कि एक बार स्वैच्छिक स्थानांतरण (Transfer) की कार्यवाही का पहला दौर शुरू हो गया और 30.6.2025 को पूरा हो गया. स्वैच्छिक स्थानांतरण या समायोजन के लिए कोई और विकल्प न होने पर प्रतिवादियों के लिए याचिकाकर्ताओं के स्थानांतरण (Transfer) पर पुनर्विचार करना खुला नहीं था.

दलीलों पर विचार करने पर कोर्ट ने पाया कि 16 जून 2025 के परिपत्र के अनुसार स्थानांतरण (Transfer) का पहला दौर 30.6.2025 को पूरा हो गया था. यह 22.7.2025 के परिपत्र से भी सामने आता है क्योंकि अधिकारियों को पूरी तरह से पता था कि स्थानांतरण का पहला दौर समाप्त हो गया था.

इसलिए, याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए किसी भी विकल्प के बिना स्थानांतरण (Transfer) पर पुनर्विचार करना बिना किसी आदेश या परिपत्र के अपने पहले के आदेश की समीक्षा करने के बराबर होगा. कोर्ट ने कहा कि इससे प्रथम दृष्टया पता चलता है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी 22.7.2025 और 8.8.2025 के आदेशों की व्याख्या करते समय गलत हैं, इसलिए मामले पर विचार करने की आवश्यकता है.

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