Bank Branch का एड्रेस चेंज हो गया, बिजनेस करेसपांडेंट आफिस भी एक्टिव को कोर्ट में सवाल उठाना उचित नहीं, याचिका खारिज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के मसले को लेकर कहा, बैंक की ब्रांच शिफ्ट करने के लिए RBI की परमिशन जरूरी नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि Bank की Branch दूसरे स्थान पर शिफ्ट की गयी और उसका एड्रेस चेंज कर दिया गया है, जिस स्थान से Branch शिफ्ट की गयी वहां बिजनेस करेसपांडेंट आफिस संचालित किया जा रहा है तो Branch को शिफ्ट करने को लेकर कोर्ट में सवाल उठाना उचित नहीं है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की बेंच ने ने Bank की Branch को दूसरे गांव में शिफ्ट किये जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है. दो जजों की बेंच ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि Bank की Branch शिफ्ट करने के लिए आरबीआई से परमिशन लेने की कोई जरूरत नहीं है.
यह याचिका सोरांव तहसील के मऊआइमा ब्लाक क्षेत्र के एक प्रधान लाल बहादुर पटेल की ओर से दाखिल की गयी थी. याचिका में आरबीआई की परमिशन के बिना Indian Bank की Branch बांका जलालपुर से सुल्तानपुर खास गांव में शिफ्ट करने को चुनौती दी गयी थी.
याचिकाकर्ता, ग्राम प्रधान का कहना था कि इससे आस-पास के गांवों के साथ-साथ उनके गांव के लोगों को भी बहुत परेशानी होगी. याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 23 के अनुसार, भारतीय रिजर्व Bank की परमिशन के बिना Branh को दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.
Reserve Bank of India से अनुमति लेने की कोई जरूरत नहीं
रिजर्व Bank की ओर से कहा गया कि रिजर्व Bank ऑफ इंडिया की ओर से Branch ऑथराइजेशन पॉलिसी के रेशनलाइजेशन गाइडलाइंस में बदलाव और बैंकिंग आउटलेट्स के मर्जर/बंद करने/शिफ्ट करने/बदलने से संबंधित इसके क्लॉज 5 से संबंधित 18 मई 2017 के निर्देशों और सर्कुलर के आधार पर बताया गया कि क्लॉज 5.2 के अनुसार डीसीसी की जरूरी मंजूरी ले ली गई है और रिजर्व Bank ऑफ इंडिया से अनुमति लेने की कोई जरूरत नहीं है.
याचिकाकर्ता ने यह तर्क देने के लिए एक्ट की धारा 23(1)(a) पर भरोसा किया कि रिजर्व Bank ऑफ इंडिया की अनुमति के बिना Branch को शिफ्ट नहीं किया जा सकता था और एक्ट की धारा 35-A के तहत जारी किया गया कोई भी सर्कुलर, कानूनी प्रावधानों को ओवरराइड नहीं कर सकता.

एक्ट की धारा 23(3) के प्रावधानों के संदर्भ में एक काउंटर एफिडेविट दायर किया गया था, जिसमें यह बताया गया कि रिजर्व Bank ऑफ इंडिया ऐसी शर्तों के अधीन अनुमति दे सकता है जो वह आम तौर पर या किसी खास मामले के संबंध में लगाना उचित समझे और इसलिए, मौजूदा मामले में 18 मई 2017 का सर्कुलर उन परिस्थितियों से संबंधित है जिनका पालन किया गया है.
RBI से परमिशन की जरूरत न होने के बारे में ये दलीलें दी गईं, तो यह दलील दी गई कि हालांकि Branch को गांव बांका जलालपुर से लगभग 5 किमी दूर सुल्तानपुर खास में शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन Branch का नाम अभी भी बांका जलालपुर ब्रांच ही है, जिससे दिक्कत हो रही है.
याचिकाकर्ता के Branch खोलने के लिए रिप्रेजेंटेशन देने पर ब्रांच का नाम पहले से ही मौजूद है. इसके अलावा, बैंक के बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के होने की बात भी नहीं बताई गई, जिसके आधार पर समय दिया गया था. Indian Bank की ओर से पेश हुए वकील ने 02 दिसंबर 2025 का ऑर्डर पेश किया जिसमें बताया गया कि Branch का नाम बांका जलालपुर ब्रांच से बदलकर मऊआइमा किया गया है.
इसके अलावा एक बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट सब-एजेंसी एग्रीमेंट भी पेश किया गया जिसमें एक बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट को नियुक्त किया गया है, साथ ही उस बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के ऑफिस की तस्वीरें भी पेश की गईं. बेंच ने माना कि इस याचिका में आगे कोई आदेश देने की जरूरत नहीं है. इस आधार पर याचिका निस्तारित कर दी गयी.
Case: Lal Bahadur Patel v. Union of India and 6 others PIL No. – 914 of 2025
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