+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

Azam Khan को जवाब के लिए मिला 2 हफ्ते का समय

रामपुर यतीमखाना ध्वस्तीकरण मामले में सरकार ने दिया जवाबी हलफनामा

Azam Khan को जवाब के लिए मिला 2 हफ्ते का समय

रामपुर में यतीमखाना ढहाए जाने के मामले में राज्य सरकार ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है. इसके बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री व पूर्व सांसद मोहम्मद Azam Khan (आजम खान) और अन्य की याचियों ने इसका प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए कोर्ट से दो सप्ताह का समय मांगा. इस मांग को स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए 16 सितंबर को पेश करने का निर्देश दिया है.

यह आदेश जस्टिस समीर जैन ने वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी, अधिवक्ता सैयद अहमद फैजान और आजम खान व उनके सहयोगी वीरेंद्र गोयल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी, अधिवक्ता शाश्वत आनंद एवं शशांक तिवारी को सुनकर दिया. कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर याचिका में संशोधन की अनुमति दी थी, जिसके बाद याचिकाएं केवल मुख्य सूचनादाताओं, विशेष रूप से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर अहमद फारूकी की दोबारा गवाही और दोषमुक्त करने वाली वीडियोग्राफी को रिकॉर्ड में लाने की मांग तक सीमित रह गईं.

याचियों (Azam Khan) का कहना है कि वीडियोग्राफी उनकी घटनास्थल पर अनुपस्थिति साबित कर सकती है. यतीमखाना ढहाए जाने के आरोप में यह मुकदमा 2019 में रामपुर के कोतवाली थाने में दर्ज 12 एफआईआर पर आधारित है. इनमें डकैती, घर में अनधिकृत प्रवेश और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप हैं. इन सभी को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) रामपुर ने एकल वाद में समाहित कर दिया था.

याचियों (Azam Khan) ने याचिकाओं में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें गवाहों को दोबारा बुलाने और वीडियोग्राफी को शामिल करने की उनकी मांग को खारिज कर दिया गया था. उनका कहना है कि यह मुकदमा राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 20 और 21 का उल्लंघन है.

इसे भी पढ़ें…

पूर्व सांसद उमाकांत यादव को राहत, सजा व दंड निलंबित

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाहगंज जिला जौनपुर में हत्या जानलेवा हमला आगजनी मामले में पूर्व सांसद उमाकांत यादव को मिली सजा व दंड पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने यह आदेश सजा के खिलाफ अपील में दाखिल अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है. यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस संतोष राय की बेंच ने उमाकांत की अर्जी पर दिया है.

याची ने सुप्रीम कोर्ट के नवजोतसिंह सिद्धू केस के फैसले का लाभ उसे भी देने की मांग की जिसमें चुनाव के मद्देनजर सजा व दंड निलंबित कर दिया गया था. याची का कहना है कि वह भी राजनीतिक व्यक्ति हैं. वह एक बार सांसद व तीन बार विधायक रह चुका है. सरकारी वकील ने विरोध किया और कहा कि याची पर आरोप गंभीर है. वह कोई राहत पाने का हकदार नहीं हैं. कोर्ट ने याची की सजा व दंड को निलंबित रखने का आदेश दिया है.

स्ट्रीट डॉग को खाना खिलाइये लेकिन ध्यान रखें कि किस स्थान पर खिलाना है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *