अंतरिम अग्रिम Bail की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करना अग्रिम जमानत मंजूर करने का बन सकता है आधार

ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उसने उसे दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है.आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. इस आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आय से अधिक खर्च के आरोपित को ट्रायल खत्म होने तक अग्रिम जमानत (Bail) मंजूर कर ली है. यह आदेश जस्टिस समीर जैन ने दिया है.
यह याचिका गौतम बुद्धनगर के ब्रह्म सिंह की ओर से दाखिल की गयी थी. याचिका में आवेदक की ओर से एफआईआर/केस क्राइम नंबर 281 ऑफ 2019, धारा 13(1)(b) और 13(2) पीसी एक्ट, थाना कासना, जिला गौतम बुद्ध नगर का जिक्र करते हुए उसे अग्रिम जमानत (Bail) पर रिहा करने की प्रार्थना की गई थी.
आवेदक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि आवेदक लोक सेवक था. आरोप के अनुसार उसका खर्च उसकी ज्ञात आय के स्रोत से अधिक था. उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह से झूठा बताया. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान भी आवेदक ने जांच में पूरा सहयोग किया. जांच अधिकारी ने उसे गिरफ्तार नहीं किया और चार्जशीट दाखिल कर दी.
कहा कि जब आवेदक ने यह अग्रिम जमानत (Bail) याचिका दायर की, तो इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने 19 मार्च 2024 के आदेश द्वारा उसे अंतरिम अग्रिम जमानत (Bail) पर रिहा कर दिया तभी से वह अंतरिम अग्रिम जमानत (Bail) पर है.
एजीए ने अग्रिम जमानत (Bail) की प्रार्थना का विरोध किया, लेकिन आवेदक के विद्वान वकील द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर दिए गए तर्क का खंडन नहीं कर सके. कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद कहा कि हालांकि यह आय से अधिक संपत्ति का मामला है और आरोप के अनुसार, आवेदक लोक सेवक था और उसका खर्च उसकी ज्ञात आय के स्रोत से अधिक था. लेकिन, रिकॉर्ड से पता चलता है कि जांच के दौरान जांच अधिकारी ने आवेदक को गिरफ्तार नहीं किया.
कोऑर्डिनेट बेंच ने अंतरिम अग्रिम Bail पर रिहा कर दिया
इसके अलावा, रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि चार्जशीट जमा होने के बाद जब आवेदक ने यह अग्रिम जमानत (Bail) याचिका दायर की, तो इस कोर्ट की कोऑर्डिनेट बेंच ने अंतरिम अग्रिम जमानत (Bail) पर रिहा कर दिया और ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उसने उसे दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है. इसके अलावा, आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है.
इसलिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, आवेदक को दी गई अंतरिम अग्रिम जमानत (Bail) की पुष्टि की जाती है. आवेदक- ब्रह्म सिंह उसी शर्त पर ट्रायल खत्म होने तक अग्रिम जमानत पर रहेगा, जो इस कोर्ट ने 19 मार्च 2024 के आदेश में लगाई थी. कोर्ट ने यह कहा कि आवेदक को अग्रिम जमानत देते समय की गई टिप्पणियाँ किसी भी तरह से ट्रायल जज को गवाहों की गवाही के आधार पर अपनी स्वतंत्र राय बनाने में प्रभावित नहीं करेंगी.
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