चेंबर आवंटन सूची पर Advocate का Chief Justice को पत्र, 25 हजार रूपये लेकर वरिष्ठता से चेंबर आवंटित करने की मांग
इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व उपाध्यक्ष Advocate हरिवंश सिंह व प्रशांत सिंह रिंकू ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर Advocate चेंबर आवंटन के लिए बार एसोसिएशन की भेजी गई सूची पर कई सवाल उठाये है और कहा है कि कई योग्य अधिवक्ताओं का नाम इस सूची में शामिल नहीं है और तमाम अयोग्य अधिवक्ता सदस्य शामिल हैं. अधिवक्ताओं ने कहा किन्हीं परिस्थितियों के कारण कोई अधिवक्ता मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका तो यह नहीं कहा जा सकता वह चेंबर के लिए पात्र नहीं हैं.

चेंबर की संख्या कम होने के कारण इसका आवंटन वरिष्ठता के आधार पर किया जाना है. केवल मतदाता सूची की वरिष्ठता वास्तविक वरिष्ठता नहीं मानी जा सकती. अधिवक्ताओं ने महिला अधिवक्ताओं, वरिष्ठ अधिवक्ताओं व पूर्व मे अभी तक आवंटित चेंबर्स के अधिवक्ताओं को आवंटन में प्रमुखता दी जानी चाहिए.
हरवंश सिंह ने बताया कि अभी तक जब भी चेंबर आवंटन हुआ है, चार दशक पहले ढाई हजार व दो दशक पहले व तीन साल पहले पांच हजार रूपए जमा कराकर चेंबर वरिष्ठता से आवंटित किया गया है. हर बार सरकारी पैसे से चेंबर निर्माण किया गया है.
किंतु इस बार सरकारी पैसे से निर्मित चेंबर्स के लिए ढाई लाख, एक लाख प्रति व्यक्ति व सीट के लिए दस हजार का प्रस्ताव मनमाना है. अधिवक्ताओं के लिए सरकारी पैसे से बने चेंबर के रखरखाव की जिम्मेदारी अन्य भवनों की तरह हाईकोर्ट की होनी चाहिए. जिसके लिए वकीलों पर बोझ डालना सही नहीं है.
Advocate ए एन शुक्ल,नीरज द्विवेदी, बीपी शुक्ल, संतोष कुमार मिश्र, संतोष कुमार त्रिपाठी बीडी पांडेय, एनके चटर्जी, अशोक सिंह, सभाजीत सिंह, मृत्युंजय तिवारी वीएस गिरी आदि वकीलों ने कहा कि हाईकोर्ट के सीनियर जस्टिस मार्कंडेय काटजू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि बार बेंच एक सिक्के के दो पहलू हैं.
Advocate न्यायपालिका का अंग
दोनों के बीच पारस्परिक संबंध है. Advocate न्यायपालिका का अंग है. अधिवक्ताओं के चेंबर में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी हाईकोर्ट की है क्योंकि बिना पढ़े वकील अदालत को सहयोग नहीं दे सकते. ऐसा होने से न्यायिक कार्य प्रभावित होगा. तभी से हाईकोर्ट की तरफ से बार एसोसिएशन व अधिवक्ता चेंबर में बिजली आपूर्ति की जा रही है.
अधिवक्ताओं की मांग है कि सरकारी पैसे से वकीलों के लिए पार्किंग व चेंबर का निर्माण किया गया है. यह भवन हाईकोर्ट का है. अधिवक्ता भी हाईकोर्ट के है इसलिए राज्य सरकार के वार्षिक बजट से भवन की देखरेख की जाय और अधिवक्ताओं से सांकेतिक 25 हजार रूपये लेकर चेंबर आवंटित किया जाय.