50 लाख की लूट के आरोपित दरोगाओं पर गोरखपुर में चल रही Criminal Case Proceeding रद नहीं होगी
कोर्ट ने दरोगा की चार महीने के लिए सशर्त जमानत की मंजूर

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 50 लाख की लूट के आरोपी पुलिस अधिकारियों की Criminal केस Proceeding रद करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है. साथ ही एक पुलिस दरोगा की चार महीने के लिए सशर्त जमानत मंजूर कर ली है और अवधि पूरी होने पर समर्पण करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस समित गोपाल ने गोरखपुर के तीनो पुलिस कर्मियों प्रचंड प्रताप सिंह, आलोक सिंह और विशाल तिवारी की याचिकाओ की सुनवाई करते हुए दिया है.
अभियोजन कथानक के अनुसार शिकायतकर्ता/विपक्षी नवीन कुमार श्रीवास्तव ने नौ अप्रैल 2024 को दारोगा आलोक सिंह (प्रभारी पुलिस चौकी बेनीगंज के प्रभारी), प्रिंस श्रीवास्तव और उसके दो-तीन साथियों के खिलाफ Criminal Case धारा 389, 406, 420, 506, 411 आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के साथ धारा 120बी आईपीसी के तहत कोतवाली में दर्ज कराई.
आरोप लगाया गया कि वह एक व्यवसायी है. शाम को तगादा करता है और अगले दिन बैंक में जमा करता है. तीन अप्रैल 2024 को सुबह लगभग छह बजे वह अपने भाई गगन श्रीवास्तव के साथ 50 लाख रुपये बैग में रखकर चरन लाल चौराहा से हरिश चौराहा की ओर मोटरसाइकिल से जा रहा था. चौकी प्रभारी तीन-चार लोगों के साथ वहां खड़े थे. रुकने का संकेत देकर बैग के बारे में पूछताछ की.
Criminal Case को सत्र अदालत ने संज्ञान लिया
उसने बताया कि बैग में 50 लाख रुपये हैं. आलोक बैग लेकर पुलिस पोस्ट के अंदर चला गया और पैसे गिनने लगा और लूट के अपराध में जेल भेजने की धमकी दी. इसके बाद पैसे अपने पास रख लिए, यह कहते हुए कि वह जांच करेगा. कैश के लिए दौड़ाया गया. परिवार वालों से चर्चा के बाद रिपोर्ट (Criminal Case) लिखाई गई. Criminal Case को सत्र अदालत ने संज्ञान लिया है. अभियुक्तों की तरफ से हाई कोर्ट में केस कार्रवाई (Criminal Case Proceeding) रद करने के लिए प्रार्थना की गई है.

सात मई को हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी. उक्त याचिका में 12 जुलाई को 2024 को सत्र अदालत द्वारा पारित आदेश रद करने की मांग थी जिसमें धारा 91 के तहत दायर उनका आवेदन खारिज कर दिया था.
हाई कोर्ट से यह भी कहा गया था कि जांच अधिकारी को निर्देश दिया जाए कि वह कोतवाली से नौ अप्रैल 2024 को 12:05 बजे से 8:20 बजे तक के सीसीटीवी फुटेज और अभियुक्तों की गिरफ्तारी के स्थान (तरंग ओवरब्रिज के पास) से संबंधित जानकारी एकत्र करें. उस पुलिस टीम के सीडीआर, जीपीएस लोकेशन, कॉल आईडी और इंटरनेट रूट ट्रैकिंग की जानकारी एकत्र करने की मांग की गई थी जिन्होंने अभियुक्त को गिरफ्तार किया था. कहा गया था कि इसे केस डायरी का हिस्सा बनाएं.”
कोर्ट ने कहा, Criminal Case में आलोक सिंह की जमानत पैरिटी (समानता) के आधार पर दी गई है. एक अभियुक्त की जमानत पहले मंजूर हो चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने 19 दिसंबर 2025 के आदेश में सह अभियुक्त प्रिंस श्रीवास्तव को जमानत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि अभियुक्त जेल में है और अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं. कुल 11 गवाह हैं. लंबी कैद और आरोप तय न होने के तथ्य को देखते हुए जमानत दी गई है. हाईकोर्ट ने आलोक की सशर्त जमानत मंजूर कर ली किंतु सभी तीनों अभियुक्तों की Criminal Case कार्यवाही रद करने की याचिका खारिज कर दी है.