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Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत 3rd party द्वारा शिकायत दायर नहीं की जा सकती

Negotiable Instruments, 1881 की धारा 138 के तहत 3rd party द्वारा शिकायत दायर नहीं की जा सकती. इसे चेक के पाने वाले या सही धारक द्वारा ही दायर किया जाना चाहिए. एक्ट की धारा 142(1)(a) साफ तौर पर कहती है कि शिकायत केवल चेक के पाने वाले या सही धारक द्वारा ही की जा सकती है. पाने वाला वह व्यक्ति होता है जिसके पक्ष में चेक जारी किया जाता है. सही धारक वह व्यक्ति होता है जो कानूनी तौर पर विचार के लिए चेक प्राप्त करता है और उसमें बताई गई राशि का हकदार बन जाता है.

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत 3rd party द्वारा शिकायत दायर नहीं की जा सकती

चेक के पाने वाले या धारक का अधिकृत प्रतिनिधि पावर ऑफ अटॉर्नी धारक या कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में कार्यवाही शुरू कर सकता है, लेकिन शिकायत अभी चेक के पाने वाले या धारक के नाम पर होनी चाहिए, न कि प्रतिनिधि की व्यक्तिगत क्षमता (3rd party) में.

कोई 3rd party या अजनबी जिसके पास चेक का कोई कानूनी हक नहीं है वह शिकायत दायर नहीं कर सकता. जो व्यक्ति न तो पाने वाला है और न ही सही धारक (3rd party) है वह शिकायत दायर नहीं कर सकता भले ही वह लेन-देन से अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो. किसी (3rd party) द्वारा अटॉर्नी धारक या मैनेजर के रूप में शिकायत तभी मान्य होती है जब वे विधिवत अधिकृत हों और शिकायतकर्ता चेक का पाने वाला या धारक हो.

कंपनियों या फर्मों के मामले में, एंटिटी एक अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से काम करते हुए शिकायतकर्ता होती है. इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत किसी तीसरे पक्ष (3rd party) द्वारा अपने नाम से की गई शिकायत तब तक मान्य नहीं है जब तक कि वह तीसरा पक्ष (3rd party) ड्यू कोर्स में होल्डर के रूप में योग्य न हो.

केवल चेक के पाने वाले या होल्डर के अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में काम न करे. इन तथ्यों को रखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस समित गोपाल ने कानपुर की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा शिकायत केस नंबर 1091/2012 (मेसर्स कृष्णा होटल बनाम राजेश कुकरेजा) में पारित आदेश को रद्द कर दिया है.

कोर्ट ने कहा कि विपक्षी के पास यह शिकायत दर्ज करने का कोई अधिकार नहीं था. ट्रायल कोर्ट ने अपने एक आदेश में शिकायतकर्ता के अधिकार के संबंध में उक्त अवलोकन का उल्लेख किया था, लेकिन बाद में रिविजनिस्ट को तलब करने वाला विवादित आदेश पारित करते समय इस पर विचार नहीं किया. कोर्ट ने रिवीजन याचिका स्वीकार करते हुए उक्त आदेश दिया.

यह रिवीजन याचिका धारा 397/401 सीआरपीसी के तहत राजेश कुकरेजा द्वारा दाखिल की गयी थी. उन्होंने कोर्ट से मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कानपुर द्वारा जारी किये गये आदेश को रद करने की मांग की थी. मामले के तथ्य यह हैं कि मेसर्स कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स ने अपने पार्टनर सरोज दुबे पत्नी वीरेंद्र दुबे के माध्यम से, राजेश कुकरेजा, निदेशक, मंगलम रेस्टोरेंट एंड होटल प्राइवेट लिमिटेड, घनश्यामदास के बेटे के खिलाफ, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1988 की धारा 138 और 142, भारतीय दंड संहिता की धारा 406 और 420 के तहत अपराध के लिए एक शिकायत दायर की.

3rd party ने पार्टनर के माध्यम से एक शिकायत दायर की है

शिकायतकर्ता ने धारा 202 सीआपीसी के तहत अपने बयान के रूप में पढ़े जाने के लिए एक हलफनामा दायर किया. ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में पाया कि रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है कि मेसर्स कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स (3rd party) ने पार्टनर सरोज दुबे के माध्यम से एक शिकायत दायर की है, जबकि चेक होटल पैराडाइज के नाम पर जारी किए गए थे.

शिकायत मेसर्स कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स (3rd party)ने पार्टनर सरोज दुबे के जरिए दायर की. जबकि शिकायत होटल पैराडाइज को अपने प्रतिनिधि के जरिए दायर करनी चाहिए थी. इसके बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कानपुर नगर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई.

संबंधित कोर्ट ने शिकायत, शिकायतकर्ता का सेक्शन 200 सीआरपीसी के तहत बयान और गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि राजेश कुकरेजा के खिलाफ सेक्शन 138 एनआई एक्ट के तहत अपराध बनता है और इसलिए उन्हें उक्त सेक्शन के तहत तलब किया. उक्त आदेश को इस कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

याचिकाकर्ता के वकील का मुख्य तर्क था कि इस मामले की कार्यवाही को मेसर्स कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स द्वारा अपने पार्टनर सरोज दुबे (3rd party) के माध्यम से याचिकाकर्ता के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत दायर शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी. जिसमें मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने शिकायतकर्ता को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि विवादित चेक होटल पैराडाइज के नाम पर जारी किए गए थे, लेकिन शिकायत मेसर्स कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स (3rd party) द्वारा अपने पार्टनर सरोज दुबे के माध्यम से दायर की है, जबकि शिकायत होटल पैराडाइज या उसके अधिकृत एजेंट द्वारा दायर की जानी चाहिए थी.

विपक्षी पार्टी के वकील ने दलीलों और रिवीजन याचिका का विरोध किया और कहा कि ट्रायल कोर्ट मामले के तथ्यों से पूरी तरह संतुष्ट था और इसलिए उसने जांच के बाद शिकायत पर संज्ञान लिया और रिवीजनकर्ता को समन भेजा. यह भी कहा गया है कि विपक्षी होटल पैराडाइज की पार्टनर है जिसने बिजनेस के उद्देश्य से रिवीजनकर्ता के साथ एक मौखिक कॉन्ट्रैक्ट किया था और इसलिए उसे शिकायत दर्ज करने का अधिकार है.

CRIMINAL REVISION No. – 2776 of 2013 Rajesh Kukreja Versus State of U.P. and Anr.

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