+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

Attendance exemption को Adjournment application मानना कानून की सही धारणा नहीं, अग्रिम जमानत खारिज करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज

न्यायालय अक्सर ऐसे मामलों का सामना करता है जहां ऐसा लगता है कि हालांकि किसी विशेष तारीख पर आरोपी की Attendance exemption (हाजिरी माफी) से छूट मांगने वाले आवेदन की प्रकृति, दायरा और उद्देश्य कार्यवाही को स्थगित करने के आवेदन से अलग है. पीठासीन अधिकारी अक्सर भ्रमित हो जाते हैं और एक छूट आवेदन (Attendance exemption) को उनके द्वारा स्थगन आवेदन माना जाता है जो कानून की सही धारणा नहीं है.

Attendance exemption को Adjournment application मानना कानून की सही धारणा नहीं, अग्रिम जमानत खारिज करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज

दोनों प्रकार के आवेदनों की वास्तविक प्रकृति और उद्देश्य की सभी जिला और सत्र न्यायाधीशों, परिवार न्यायालयों के प्रधान न्यायाधीशों, वाणिज्यिक न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों और उत्तर प्रदेश राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों को याद दिलाने जरूरत है.

यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस नलिन कुमार श्रीवास्तव ने वाराणसी के पियूष वर्मा की तरफ से अग्रिम जमानत को खारिज करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज करते हुए सुनाया है. उन्होंने न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल इस आदेश की प्रति सभी संबंधित को भेजने का निर्देश दिया है.

याचिकाकर्ता पियूष वर्मा ने वाराणसी जिले के भेलूपुर थाने में श्रीमती पूजा ग्रोवर और उनके पति उमंग ग्रोवर के खिलाफ धारा 420, 406, 120-B IPC के तहत अपराधों के लिए न्यायालय में शिकायत केस नंबर 115562/2023 दायर किया था. धारा 200 और 202 सीआरपीसी के तहत शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद संबंधित न्यायालय ने आरोपियों को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया.

इसे इस न्यायालय में आवेदन U/S 482 नंबर 20040/2024 के माध्यम से चुनौती दी गई थी. इस न्यायालय ने 13 दिसंबर 2024 के आदेश द्वारा उक्त समन आदेश को रद्द कर दिया और मामले को संबंधित न्यायालय को कानून के अनुसार शीघ्रता से नए सिरे से समन के बिंदु पर आदेश पारित करने के लिए वापस भेज दिया गया.

इसके बाद, ट्रायल कोर्ट ने एक आदेश पारित कर दोनों आरोपियों को धारा 406 और 120-B IPC के तहत अपराधों के लिए मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया. उक्त आदेश के पालन में विपक्षी ने ट्रायल कोर्ट के सामने अग्रिम जमानत के लिए एप्लीकेशन दी, जिसे मंजूर कर लिया गया. इस एंटीसेपेट्री बेल को रद करने के लिए आवेदन किया गया.

आवेदक के वकील ने दलील दी है कि आरोपी के खिलाफ रिकॉर्ड पर विश्वसनीय सबूत मौजूद हैं. विपक्षी को अग्रिम जमानत देने की शर्तों में से एक यह थी कि वह इस मामले की सुनवाई में पूरी तरह सहयोग करेगी और उसकी तरफ से कोई अनावश्यक स्थगन नहीं मांगा जाएगा.

बताया गया कि आरोपी अग्रिम जमानत मिलने के बाद सुनवाई में सहयोग नहीं कर रही है. लगातार दो बार उसकी तरफ से स्थगन आवेदन दिए गए. ऐसे में आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत रद्द की जानी चाहिए. आरोपी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने अग्रिम जमानत रद्द करने की प्रार्थना का विरोध किया और कहा कि मामला अभी तक सबूतों के लिए तय नहीं किया गया है.

जिन दो तारीखों पर स्थगन आवेदन दिए जाने की बात कही जा रही है उन तारीखों पर Attendance exemption (हाजिरी माफी) के आवेदन दिए गए थे न कि स्थगन के आवेदन. बताया गया है कि आरोपी ट्रायल कोर्ट के साथ पूरी तरह सहयोग करने के लिए तैयार है और वह वास्तव में ट्रायल कोर्ट के साथ सहयोग कर रही है और उसके कथित असहयोग के कारण अब तक न्यायिक कार्यवाही में कोई बाधा नहीं आई है.

जिस तारीख को Attendance exemption का आवेदन दिया गया था, उस तारीख को मामला सबूतों के लिए तय नहीं था

यह भी आग्रह किया गया कि जिस तारीख को Attendance exemption (हाजिरी माफी) का आवेदन दिया गया था, उस तारीख को मामला सबूतों के लिए तय नहीं था. आरोपी की अनुपस्थिति में भी सबूत दर्ज किए जा सकते हैं और आरोपी को कोई आपत्ति नहीं होगी. चूंकि आरोपी पहले ही अदालत में पेश हो चुकी है, इसलिए ट्रायल कोर्ट द्वारा उसकी व्यक्तिगत हाजिरी माफी दी जा सकती है.

दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि विचाराधीन आदेश में कोई कमी या अवैधता नहीं है जिसके लिए इस न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो. आरोपी न्यायालय में Attendance exemption (हाजिरी माफी) के संबंध में अपनी दलीलों के समर्थन में वरिष्ठ अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के भास्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम भिवानी डेनिम @ अपैरल्स लिमिटेड, (2001) 7 SCC 401 और रामेश्वर यादव बनाम बिहार राज्य, (2018) 4 SCC 608 के फैसलों पर भरोसा जताया.

कोर्ट ने माना कि 10.11.2025 के आवेदन को देखने से स्पष्ट है कि यह स्थगन आवेदन नहीं बल्कि Attendance exemption (हाजिरी माफी) आवेदन है. Attendance exemption (हाजिरी माफी) आवेदन और कार्यवाही के स्थगन के बीच बहुत बड़ा अंतर है. ऐसा लगता है कि आवेदक इस अंतर को समझने में असमर्थ रहा है. कोर्ट ने कहा कि आवेदक के वकील द्वारा दी गई दलीलों में कोई दम नहीं है. विपक्षी को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने का कोई अच्छा आधार नहीं है क्योंकि आरोपी को न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत देते समय लगाई गई किसी भी शर्त का उसके द्वारा उल्लंघन नहीं किया गया है.

CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL CANCELLATION APPLICATION No. – 109 of 2025; Piyush Verma V/s State of U.P. and Another

इसे भी पढ़ें….

One thought on “Attendance exemption को Adjournment application मानना कानून की सही धारणा नहीं, अग्रिम जमानत खारिज करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *