+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

Order के खिलाफ Appeal मात्र से Court Proceeding पर रोक नहीं लग जाती, सेशन व मजिस्ट्रेट कोर्ट धारा 228 CrPC और 240 CrPC में आरोप तय करने के लिए बाध्य

Order के खिलाफ Appeal मात्र से Court Proceeding पर रोक नहीं लग जाती, सेशन व मजिस्ट्रेट कोर्ट धारा 228 CrPC और 240 CrPC में आरोप तय करने के लिए बाध्य

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी Order के खिलाफ अपील दायर करने मात्र से संबंधित अदालत की कार्यवाही (Court Proceeding) पर रोक नहीं लग जाती. कोर्ट की रोक नहीं है तो Order के तहत कार्रवाई की जायेगी. जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने धोखाधड़ी से जुड़े दो दशक पुराने मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कौशांबी के आदेश को चुनौती देने वाली अविनाश चंद्र श्रीवास्तव की याचिका खारिज कर दी है.

कोर्ट ने कहा,  यदि सत्र अदालत ने धारा 227 सीसीआरपीसी के तहत आरोपित को डिस्चार्ज नहीं किया है अथवा मजिस्ट्रेट ने धारा 239 सीसीआरपीसी के तहत आरोपित को डिस्चार्ज करने का कोई आधार नहीं पाया है तो जब तक डिस्चार्ज आवेदन  खारिज करने के Order को उच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी जाती और रोक नहीं लगती, सेशन व मजिस्ट्रेट कोर्ट धारा 228 सीसीआरपीसी और 240 सीसीआरपीसी में आरोप तय करने के लिए बाध्य हैं.

कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया है कि वह इस Order की प्रति सभी जिला अदालतों तक भिजवाएं. इस क्रम में जिला जज अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों को यह निर्देश दें कि जब तक हाई कोर्ट रोक नहीं लगाता ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने के लिए बाध्य हैं.

कोर्ट ने कहा, कई मामलों में देखा गया है कि ट्रायल कोर्ट अक्सर डिस्चार्ज आवेदन खारिज करते समय आरोप तय करने के लिए महीने भर बाद की तारीख देते हैं और कुछ मामलों में आरोप तय नहीं करते हैं क्योंकि उच्च न्यायालय में अपील, रिवीजन या रिट लंबित है. अंतिम सुनवाई को स्थगित कर देते हैं भले ही उच्च न्यायालय ने आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने का कोई Order नहीं दिया हो.

मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि 2004 में मंझनपुर कोतवाली में याची के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि पदमुक्त होने के बाद उसने न तो चार्ज सौंपा और न ही ग्रामीण विकास के संबंधित कागजात जमा किए. यह भी आरोप था कि उसने जाली हस्ताक्षर करके कुछ रसीद/बिल वाउचर तैयार किए.

Order पारित करते समय, पुलिस रिपोर्ट और उसके साथ संलग्न दस्तावेजों को ध्यान में रखा जाएगा

जांच अधिकारी ने धारा 161 सीसीआरपीसी के तहत गवाहों के बयान दर्ज कर दस्तावेजी सबूत भी एकत्र किए. इसके बाद 24 दिसंबर 2006 को याची तथा सह अभियुक्त इंद्र पाल सोनकर के खिलाफ आइपीसी की विभिन्न धाराओं में 420 व 120 बी भी थी, आरोप पत्र दायर किया गया.

सीजेएम ने 21 फरवरी 2007 को संज्ञान लिया. लेकिन अभी तक आरोपी के खिलाफ कोई आरोप तय नहीं किया गया है. याची का डिस्चार्ज आवेदन सात फरवरी 2024 को खारिज किया गया. डिस्चार्ज आवेदन में 25 अगस्त 2023 की वह अनुशासनात्मक जांच रिपोर्ट संलग्न की थी, जिसमें उसे निर्दोष पाया गया था. सीजेएम ने आवेदन यह कहते हुए खारिज कर किया था धारा 239 सीसीआरपीसी के तहत आवेदन पर Order पारित करते समय, पुलिस रिपोर्ट और उसके साथ संलग्न दस्तावेजों को ध्यान में रखा जाएगा.

इसे भी पढ़ें….

One thought on “Order के खिलाफ Appeal मात्र से Court Proceeding पर रोक नहीं लग जाती, सेशन व मजिस्ट्रेट कोर्ट धारा 228 CrPC और 240 CrPC में आरोप तय करने के लिए बाध्य

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *