कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए का Dismissal आदेश निरस्त, 15 जनवरी तक डीजीपी यूपी को अवगत कराने और कोर्ट के फैसले ‘सेवा में बहाली’ का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश
जहाँ पर कानूनी प्रकिया का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया है, उन परिस्थितियों में यह जरूरी नहीं है कि रिवीजन उच्चाधिकारियों के यहाँ दाखिल किया जाये: हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कम्प्यूटर ऑपरेट ग्रेड-ए के विरूद्ध एसएसपी झांसी द्वारा पारित बर्खास्तगी (Dismissal) आदेश और डीआईजी परिक्षेत्र झाँसी के अपीलीय आदेश को निरस्त करते हुये याची को सेवा में बहाल करने के आदेश दिया है. जस्टिस विकास बुद्धवार की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा विभिन्न केस में दी गयी इस व्यवस्था पर याची के अधिवक्ता के तर्क “जहाँ पर कानूनी प्रकिया का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया है, उन परिस्थितियों में यह जरूरी नहीं है कि रिवीजन उच्चाधिकारियों के यहाँ दाखिल किया जाये” से सहमति जतायी.

बेंच ने माना कि प्रकरण में पीठासीन अधिकारी द्वारा नियम व कानून का पालन नहीं किया गया है तथा बर्खास्तगी (Dismissal) आदेश नियम व कानून तथा विधि की व्यवस्था के सिद्धान्तों के विपरीत है. याची की तरफ से कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और आर्या गौतम ने पैरवी की.
यह रिट याचिका कम्प्यूटर ऑपरेट ग्रेड-ए अनिल कुमार पटेल की तरफ से दाखिल की गयी थी. वर्ष 2021 में थाना कटेरा जनपद झाँसी में नियुक्ति के दौरान उनके विरूद्ध प्रभारी निरीक्षक, नवाबाद, जनपद झॉसी में एक रिपोर्ट दिनांक 13.05.2021 को प्रस्तुत करते हुये अवगत कराया गया कि दिनांक 12.05.2021 को वादिनी कुमारी नीलम जनपद झाँसी की लिखित तहरीर के आधार पर मु०अ०सं० 150/2021 घारा 376 आई०पी०सी० व 3(2)/5, एस०सी०/एस०टी० एक्ट पंजीकृत कराया गया है. जिसकी विवेचना क्षेत्राधिकारी नगर, झॉसी द्वारा सम्पादित की जा रही है. सीओ सिटी झॉसी के निर्देश पर 13 मई 2021 को याची अनिल पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.
सीओ ने अपनी जांच में यह भी मेंशन किया कि, याची अनिल पटेल पुलिस विभाग के इम्प्लाई थे, उनके इस कृत्य से पुलिस की छवि धूमिल हुई है. उन्होंने अनिल पटेल के खिलाफ कार्यवाही किये जाने का अनुरोध किया. इसके बाद प्रकरण की प्रारम्भिक जॉच सीओ लाइन को आवंटित करते हुये याची को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया. इसके बाद याची को 05 अप्रैल 2022 को प्रचलित विभागीय कार्यवाही/पंजीकृत अभियोग पर बिना कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले तत्काल प्रभाव से बहाल किया गया.
जाँचकर्ता अधिकारी द्वारा प्रश्नगत प्रकरण की जॉच आख्या 24 मई 2021 प्रस्तुत की गयी. जिसमें इनको वादिया मुकदमा कुमारी नीलम श्रीवास से प्रेम प्रंसग होने तथा शादी का आश्वासन दे कर नशील दवा खिलाकर अपने इलाईट स्थित कमरे पर ले जा कर शारीरिक सम्बन्ध बनाने के कारण उक्त मुकदमा पंजीकृत होना तथा जेल जाने के साथ ही साथ पुलिस जैसे अनुशासित बल में रहते हुये, उ०प्र० आचरण नियमावली-1956 का उल्लंघन कर आपराधिक कृत्य कर के पुलिस की छवि धूमिल करने का दोषी पाया गया.

तत्पश्चात् पुलिस महानिदेशक के आदेश 26. 11.2019 में निहित निर्देशों के अनुपालन में जाँच आख्या पर याची के विरुद्ध उ०प्र० अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दण्ड एवं अपील) नियमावली-1991 के नियम-14(1) के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही किये जाने का निर्णय लेते हुए विभागीय कार्यवाही अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जनपद झाँसी को आवंटित की गयी. याची के विरूद्ध आरोप पत्र प्रेषित करने के पश्चात् विभागीय कार्यवाही पीठासीन अधिकारी/अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जनपद झांसी द्वारा सम्पादित की गयी.
12 दिसंबर 2022 को जॉच रिपोर्ट एसएसपी झांसी को प्रेषित की गयी, जिसमें याची को कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए को सेवा से हटाये जाने (Dismissal) की संस्तुति की गयी. इस रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी झांसी द्वारा उन्हें सेवा से बर्खास्त (Dismissal) कर दिया गया. बर्खास्तगी (Dismissal) आदेश के विरूद्ध याची ने विभागीय अपील पुलिस उपमहानिरीक्षक, झॉसी परिक्षेत्र के समक्ष प्रेषित की. डीआईजी ने अपील को खारिज कर दिया.
बर्खास्तगी (Dismissal) आदेश एवं अपीलीय आदेश को याची ने रिट याचिका दाखिल करते हुये हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने. मो० हनीफ खॉन बनाम उ०प्र० सरकार व अन्य, मो० मियां बनाम उ०प्र० सरकार व अन्य तथा सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ उत्तराखण्ड बनाम खड़क सिंह में प्रतिपादित किये गये विधि की व्यवस्था के सिद्धान्त को दृष्टिगत रखते हुये फाइन्डिंग रिकार्ड की कि प्रकरण में पीठासीन अधिकारी द्वारा जो कार्यवाही की गयी है वह APPENDIX-1 of Rules 1991 के नियम के विरूद्ध है, जिसमें कि पुलिस ऑफिसर के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही करने की प्रकिया निर्धारित की गयी है.
Dismissal आदेश एवं अपीलीय आदेश निरस्त
जस्टिस विकास बुद्धवार ने दोनो पक्षों की बहस सुनने के पश्चात् बर्खास्तगी (Dismissal) आदेश एवं अपीलीय आदेश को निरस्त करते हुये याची को सेवा में बहाल करने के आदेश पारित किये हैं. सिंगल बेंच ने कहा है कि याची के प्रकरण में सक्षम अधिकारी नये सिरे से परीक्षण करें एवं हाईकोर्ट के आदेश में दी गयी फाइन्डिंग का अवलोकन करने के पश्चात् कानून के तहत आदेश पारित कर सकते हैं. हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार कम्प्लायंस को निर्देशित किया है कि वे हाईकोर्ट के आदेश से डीजीपी को 15.01.2026 तक अवगत कराते हुए अनुपालन सुनिश्चित करावें.