+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

MMRD एक्ट की धारा 3(d) में परिभाषित खनन कार्य व्यापक, कानून फायदेमंद , इसका उदारतापूर्वक अर्थ लगाया जाना चाहिए: HC

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि माइंस एंड मिनरल्स रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट (MMRD) एक्ट का उदारतापूर्वक अर्थ लगाया जाना चाहिए क्योंकि यह एक फायदेमंद कानून है और ऐसा करने से ही कानून का मकसद पूरा होगा. जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डिवीजन बेंच ने कहा, MMRD एक्ट में सेक्शन 9-B को शामिल करना माइनिंग ऑपरेशन से प्रभावित लोगों के फायदे के लिए है.

इस कमेंट के साथ बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है. बेंच ने कहा कि MMRD एक्ट के सेक्शन 9-B (5) में कहा गया है कि लीज होल्डर को उतनी रकम देनी होगी जो एक्ट की दूसरी अनुसूची के अनुसार दी गई रॉयल्टी के उतने प्रतिशत के बराबर हो, जो उस रॉयल्टी के एक तिहाई से ज्यादा न हो.

MMRD एक्ट की धारा 3(d) में परिभाषित खनन कार्य व्यापक है,  कानून फायदेमंद , इसका उदारतापूर्वक अर्थ लगाया जाना चाहिए: HC

प्रकरण सोनभद्र जिले से जुड़ा हुआ है. भू—विज्ञान और खनन निदेशालय, लखनऊ और उसके अधीनस्थ कार्यालयों ने खनिज चूना पत्थर की नीलामी के लिए ई-टेंडर जारी करके प्रस्ताव आमंत्रित किए. यह सोनभद्र जिले में स्थित ओबरा ‘C’ (2 x 660 MW) पावर प्रोजेक्ट के विस्तार के उद्देश्य से ब्लास्टिंग/खुदाई और समतलीकरण अभियान के दौरान प्राप्त हुआ था.

इसे तीन ब्लॉकों में विभाजित किया गया था. इस नीलामी प्रक्रिया को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी. याचिका के लंबित रहने के दौरान डीएम ने एक आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने याचिकाकर्ता को रॉयल्टी का 10% जमा करने का निर्देश दिया. इसे याचिकाकर्ता ने संशोधन आवेदन दायर करके चुनौती दी थी जिसे हाई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था.

नीलामी नोटिस में खनिज का मूल्य ‘रॉयल्टी’ के रूप में बताया गया था, जिसका मतलब खनिज की बिक्री कीमत था, न कि MMRD एक्ट के प्रावधानों के तहत समझी जाने वाली रॉयल्टी. याचिकाकर्ता ने तीनों जगहों के लिए बोली लगाई और याचिकाकर्ता को 344/Mines/2018 जारी किया गया. उसे सार्वजनिक नोटिस में क्रमशः पार्ट-II और पार्ट-III के रूप में वर्णित चूना पत्थर के लिए सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया. DMF में योगदान की मांग से दुखी होकर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का रुख किया.

तथ्यों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा, उपरोक्त फैसले को पढ़ने से यह सुरक्षित रूप से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि MMRD एक्ट की धारा 3(d) में परिभाषित खनन कार्य व्यापक है, ताकि हर उस गतिविधि को शामिल किया जा सके जिससे खनिज को पृथ्वी से निकाला या प्राप्त किया जाता है. भले ही ऐसी गतिविधि सतह पर या पृथ्वी के अंदर गहराई में की जाती हो.

ऐसा क्षेत्र जिसमें MMRD एक्ट या रूल्स, 2017 के तहत माइनिंग ऑपरेशन किया जा रहा है या किया जाएगा, वह प्रभावित क्षेत्र’ है

“सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांत से, कानून अब और अस्पष्ट नहीं है कि कोई भी पक्ष एक ही समय में किसी दस्तावेज/साधन के कुछ हिस्सों को स्वीकार और अस्वीकार नहीं कर सकता है, क्योंकि एक बार जब वह कुछ दस्तावेजों/साधनों का लाभार्थी बन जाता है तो ऐसा पक्ष उक्त दस्तावेज/साधन के उन हिस्सों की प्रतिबद्धता का सम्मान करने का विकल्प नहीं चुन सकता है जो उसके लिए फायदेमंद हैं और उन शर्तों से बचने की कोशिश नहीं कर सकता है जो उस पर दायित्व डालती हैं”.

कोर्ट ने कहा, कोई भी ऐसा क्षेत्र जिसमें MMRD एक्ट या रूल्स, 2017 के तहत माइनिंग ऑपरेशन किया जा रहा है या किया जाएगा, वह प्रभावित क्षेत्र’ है. रूल 2(1)(c) के अनुसार, जो व्यक्ति माइनिंग से जुड़ी गतिविधि से घायल होता है या जिसकी प्रॉपर्टी को नुकसान होता है, वह एक प्रभावित व्यक्ति होगा.

]कोर्ट ने टिप्पणी की कि लाभकारी कानून की व्याख्या में, इच्छित लाभार्थियों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए कानून के मूल उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए उदार और उद्देश्यपूर्ण निर्माण शामिल है. इसलिए, सेक्शन 9-B की संकीर्ण व्याख्या MMDR एक्ट के सेक्शन 9-B को शामिल करने के मूल उद्देश्य को ही बेकार कर देगी, जो उन आम लोगों के फायदे के लिए है जो माइनिंग ऑपरेशन से प्रभावित होते हैं और माइनिंग ऑपरेशन के कारण चोट और नुकसान झेलते हैं.

कोर्ट का मानना था कि याचिकाकर्ता LOI के पैराग्राफ-3 में बताई गई शर्तों से बंधा हुआ है, इसलिए, वह DMF योगदान के लिए बताई गई रकम का भुगतान करने की अपनी जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता. यह कहते हुए कि DMF योगदान MMRD एक्ट के दूसरे शेड्यूल के अनुसार कैलकुलेट की गई रॉयल्टी के प्रतिशत पर आधारित होना चाहिए था न कि नीलामी की रकम पर.

बेंच ने कहा कि, याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहा कि प्रतिवादी-राज्य ने निष्पक्ष रूप से काम नहीं किया है. ऐसे में उक्त फैसला इस मामले के तथ्यों पर लागू नहीं होता है. हाई कोर्ट ने रिट याचिका खारिज कर दी है.

इसे भी पढ़ें…

One thought on “MMRD एक्ट की धारा 3(d) में परिभाषित खनन कार्य व्यापक, कानून फायदेमंद , इसका उदारतापूर्वक अर्थ लगाया जाना चाहिए: HC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *