2 जजों की बेंच ने मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ की Degree Scam मामले के आरोपित नितिन कुमार को राहत देने से इंकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ की फर्जी Degree Scam मामले की आरोपी नितिन कुमार की याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से जारी रिमांड व गिरफ्तारी आदेश को रद्द करने की मांग में दायर याचिका पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि किसी अभियुक्त को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी रिकवरी मेमो के माध्यम से दे दी गई है, तो केवल ‘अरेस्ट मेमो’ में उन आधारों का उल्लेख न होना पूरी गिरफ्तारी (Degree Scam में) को अवैध नहीं बनाता. यह आदेश जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है.
मार्कशीट बनाने वाले एक बड़े रैकेट (Degree Scam) से जुड़ा
यह मामला मोनाड यूनिवर्सिटी में नकली डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले एक बड़े रैकेट (Degree Scam) से जुड़ा है. पुलिस और एसटीएफ ने छापेमारी कर भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए थे. याचिकाकर्ता नितिन कुमार सिंह को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और मजिस्ट्रेट की ओर से न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया था. इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी.

याची अधिवक्ता ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय ‘अरेस्ट मेमो’ में गिरफ्तारी के आधारों (Degree Scam) का लिखित उल्लेख नहीं है. यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है. उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामी के कारण रिमांड आदेश भी अवैध है और याची को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए.
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कर्नाटक राज्य बनाम श्री दर्शन (2025) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल तकनीकी खामी या किसी दस्तावेज में चूक (Degree Scam) रिमांड को तब तक अवैध नहीं बनाती, जब तक कि अभियुक्त को वास्तव में गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी हो. इस मामले में, गिरफ्तारी के समय एक विस्तृत ‘रिकवरी मेमो’ तैयार किया गया था जिस पर याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर थे.
इसमें बरामद वस्तुओं और संबंधित धाराओं का पूरा विवरण था, जिसे न्यायालय ने गिरफ्तारी के आधारों की पर्याप्त लिखित सूचना माना. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची को नियमित जमानत के लिए सक्षम न्यायालय में आवेदन करना चाहिए.
दहेज हत्या आरोपी में सिद्ध दोष बंदी पति की सजा निलंबित को हाईकोर्ट से मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के आरोप में 10 साल की सजा भुगत रहे पति की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है. यह आदेश जस्टिस वाणी रंजन अग्रवाल ने दिया है . याची के अधिवक्ता आदर्श शुक्ला ने बताया कि पत्नी को जहर देकर एवं दहेज प्रताड़ना के आरोप में पति एवं सास ससुर एवं देवर के खिलाफ वाराणसी के लंका थाने में एफआईआर दर्ज हुआ था .
जिला सत्र न्यायाधीश वाराणसी ने सबको 10 वर्ष कारावास एवं ₹20 हजार का जुर्माने से दंडित किया. सिद्ध दोष बंदी मुन्ना लाल के पुत्र संजीव कुमार का विवाह वाराणसी के थाना चेतगंज निवासी दयाशंकर की पुत्री उर्मिला के साथ 18 अप्रैल 2006 को हुआ था शादी के 3 साल बाद ही पत्नी ने जहर खाकर जान दे दी. कहा कि इसके पहले सास ससुर एवं देवर को जमानत मिल चुकी है. सजा के खिलाफ अपील की शीघ्र सुनवाई की संभावना नहीं है.जिसपर कोर्ट के जमानत मंजूर कर ली.
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