हाईकोर्ट ने कहा, Teacher बच्चों के भविष्य को आकार देने वाले प्रेरक
प्राथमिक विद्यालयों के Teachers की समय से Attendence की नीति बनाने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि Teachers बच्चों के भविष्य को आकार देने वाले ज्ञान के स्तंभ और समाज के आवश्यक अंग है. इनसे छात्रों के चरित्र का निर्माण होता है. कोर्ट ने कहा Teachers के स्कूल में समय से न आने से अनिवार्य शिक्षा कानून का उद्देश्य विफल हो रहा है. इसलिए सरकार का दायित्व है कि वह ऐसी व्यवस्था करे ताकि बच्चों को शिक्षा मिल सके. कोर्ट ने विशेष सचिव बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश को तीन माह में ऐसी नीति बनाने का निर्देश दिया है जिससे Teachers समय से स्कूल पहुंचे.
कोर्ट ने साथ ही स्कूल से नदारद रहने वाली याची अध्यापिकाओं (Teachers) को कोई राहत न देते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच कार्यवाही दो माह में पूरी करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने इंद्रा देवी व श्रीमती लीना सिंह चौहान की याचिका पर दिया है.
कोर्ट ने पुराणों स्मृतियों व धर्म ग्रंथों का उद्धरण देते हुए ( गुरू) शिक्षक (Teachers) की महिमा और महत्व का बखान किया. कहा, डा राधाकृष्णन ने कहा था कि शिक्षा कि सफलता अध्यापक पर निर्भर है जो छात्र के चरित्र निर्माण में सहायक होता है. महात्मा गांधी ने भी कहा था कि चरित्र के बिना कोई अध्यापक (Teachers) नहीं हो सकता.
अध्यापक (Teachers) ऐसा हो जिसकी शिक्षा छात्र के हृदय को छू जाय. कोर्ट ने कहा कि गुरू शिव की तीन आंखें, विष्णु के चार हाथ व ब्रह्मा के चार मुख की तरह होता है. गुरु को ईश्वर से कम नहीं माना गया है. विष्णु स्मृति ,मनु स्मृति में गुरू को माता पिता के समान कहा गया है.देवल स्मृति ११ प्रकार के गुरू का वर्णन करती है.
कोर्ट ने महाभारत काल में कर्ण के झूठ बोलकर परशुराम से शिक्षा लेने व एकलव्य के गुरू द्रोण के शिक्षा देने से इंकार के बावजूद उनकी मूर्ति के सामने अभ्यास करने को गुरू समक्ष समर्पण का उद्धरण भी दिया. साथ ही ऐतिहासिक गुरूकुलो तक्षशिला,नालंदा, विक्रमशिला की चर्चा की. 2700 साल पहले भारत आये चाइना के पर्यटक ने कहा था कि विश्वविद्यालय में 10 हजार छात्रों के लिए विभिन्न विधाओं के 1500 शिक्षक थे.
Teachers का समाज में विशेष स्थान
कोर्ट ने कहा प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों (Teachers) का समाज में विशेष स्थान है. बच्चों के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है.यह एक आदर्श प्रोफेशन है.यदि शिक्षक स्कूल ही न जाय तो बच्चों के शिक्षा के मूल अधिकारों का क्या होगा. बता दें कि बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूल का निरीक्षण किया. याची उपस्थित नहीं मिले. जिस पर इन्हें निलंबित कर जांच बैठाई गई है. कोर्ट ने कहा ऐसे मामलों की हाईकोर्ट में बाढ़ आई हुई है.
स्कूल से गैर हाजिर अध्यापकों (Teachers) के खिलाफ कार्रवाई होती है तो वे हाईकोर्ट का रूख करते हैं. कोर्ट ने सरकार के आला अधिकारियों से जानकारी मांगी तो बताया गया कि टास्कफोर्स का गठन जिला व ब्लाक स्तर पर किया गया है. अध्यापकों की डिजिटल उपस्थिति ली जा रही. इस संबंध में नीति तैयार करने के लिए बैठक हुई है. सरकार शीघ्र ही नीति लागू करेगी ताकि अध्यापक समय से स्कूल पहुंचें.
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