‘Criminal background के वकील कानून के राज के लिए खतरा’
इलाहाबाद HC ने राज्य में वकीलों के खिलाफ पेंडिंग केस की डिटेल मांगी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डायरेक्टर जनरल उत्तर प्रदेश पुलिस और पुलिस डायरेक्टर जनरल (प्रॉसिक्यूशन) को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड वकीलों के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल (Criminal) केस पर पूरे राज्य का डेटा जमा करने का निर्देश दिया है. जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने यह देखते हुए डिटेल मांगी कि आपराधिक (Criminal) पृष्ठभूमि वाले कुछ वकीलों के व्यवहार से डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी के कामकाज पर बुरा असर पड़ा है. कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि कई जिलों में गंभीर क्रिमिनल (Criminal) आरोपों का सामना कर रहे वकील न केवल प्रैक्टिस कर रहे हैं, बल्कि संबंधित डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में बड़े पदों पर भी हैं.
बेंच ने यह बात मोहम्मद कफील नाम के एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए कही जो 2022 से बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड हैं और डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, इटावा के लाइफ-टाइम मेंबर हैं. उन्होंने इटावा के एडिशनल सेशंस जज के एक ऑर्डर को चैलेंज करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसने एक कंप्लेंट केस में पुलिस अधिकारियों को बुलाने की उनकी अर्जी खारिज कर दी थी.
उन्होंने असल में आरोप लगाया कि 13 नवंबर 2025 को रेलवे स्टेशन के पास अंडे की दुकान पर एक पुलिस कांस्टेबल ने उन पर हमला किया. उन्हें धमकाया और घूंसा मारा. राज्य के वकील ने एक कंप्लायंस एफिडेविट फाइल किया जिससे पता चला कि पिटीशनर खुद कई क्रिमिनल (Criminal) केस में शामिल था.
गैंगस्टर्स एक्ट जालसाजी एक्सटॉर्शन और Criminal कॉन्सपिरेसी के चार्ज
जिसमें यूपी गैंगस्टर्स एक्ट जालसाजी एक्सटॉर्शन और क्रिमिनल (Criminal) कॉन्सपिरेसी के तहत चार्ज शामिल हैं. इसके अलावा, राज्य के एफिडेविट में यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता के पांच भाइयों का नाम दर्जनों केस में है, जिनमें काउ स्लॉटर एक्ट और पब्लिक गैंबलिंग एक्ट से लेकर पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर अपराध और हत्या की कोशिश के चार्ज शामिल हैं.

कोर्ट ने कहा कि यह माना जाता है कि याचिकाकर्ता Criminal केस में फंसा हुआ है और उसके सभी भाइयों की पहचान Hard Criminal के तौर पर की गई. जस्टिस दिवाकर ने कहा कि हर इंसान को दोषी ठहराए जाने तक बेगुनाह माना जाता है, लेकिन एक वकील की पिछली जिंदगी बेशक पर्सनल और प्रोफेशनल ईमानदारी दोनों पर असर डालती है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि लीगल सिस्टम को अपनी ताकत सिर्फ कानूनी नियमों से नहीं बल्कि उस नैतिक लेजिटिमेसी से मिलती है, जो उसकी निष्पक्षता और ईमानदारी पर जनता के भरोसे से आती है.
क्राइम की साइकोलॉजी और प्रोफेशनल एथिक्स के बारे में एक जरूरी बात में कोर्ट ने यह कहा “क्राइम सोच से शुरू होता है और सोच व्यवहार पर असर डालती है. इसलिए जब गंभीर क्रिमिनल आरोपों का सामना कर रहे लोग लीगल सिस्टम में असरदार पदों पर होते हैं तो यह सही चिंता होती है कि वे प्रोफेशनल लेजिटिमेसी की आड़ में काम करते हुए पुलिस अधिकारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं पर गलत तरीके से असर डाल सकते हैं.”
कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थितियां भले ही कभी-कभार हों कानून के राज के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. न्याय में गड़बड़ी को रोकने के लिए ज्यूडिशियल सुपरिंटेंडेंस का असरदार तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि सिस्टम में आम नागरिक का भरोसा बना रहे.
कोर्ट का यह भी मानना था कि यह देखना जरूरी है कि क्या किसी वकील का Criminal केस में शामिल होना उनकी प्रोफेशनल ईमानदारी पर असर डालता है और क्या वे फेयर और भरोसेमंद तरीके से अपनी ड्यूटी निभा सकते हैं. केस के मेरिट पर कोई राय दिए बिनाकोर्ट ने सभी कमिश्नर, एसएसपी और एसपी को डीजीपी के जरिए राज्य भर में वकीलों के खिलाफ पेंडिंग Criminal केस का डेटा एक टेबल के रूप में जमा करने का निर्देश दिया है.
जानकारी में ये चीजें होनी चाहिए
- क्राइम नंबर और सज़ा के नियमों के साथ FIR दर्ज करने की तारीख.
- संबंधित पुलिस स्टेशन का नाम.
- जांच का मौजूदा स्टेटस और नतीजे की तारीख.
- चार्जशीट फाइल करने और चार्ज फ्रेम करने की तारीख. सरकारी गवाहों की जांच की डिटेल्स और ट्रायल का मौजूदा स्टेटस.
- कोर्ट ने साफ किया कि अधिकारियों को जस्टिस सिस्टम की सुरक्षा के मकसद को पाने के लिए जरूरी और जानकारी देने की आजादी है, अगर जरूरत हो तो सील्ड कवर में भी जानकारी देने की इजाजत है.
- हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि एडमिनिस्ट्रेशन का कोई भी ‘ढिलाई भरा’ रवैया गंभीरता से लिया जाएगा. रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को आदेश तुरंत संबंधित अधिकारियों, जिसमें एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) भी शामिल हैं, को बताने का निर्देश दिया गया. सुनवाई 9 दिसंबर को होगी.
One thought on “‘Criminal background के वकील कानून के राज के लिए खतरा’”