सर्विस बुक, पैन व आधार कार्ड में मृतकर्मी की Wife के नाम में भिन्नता को 1 माह में तय करें
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर विद्युत वितरण कंपनी को एक माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्विस बुक व पैन आधार कार्ड में मृतक कर्मी की wife के नाम में भिन्नता को एक माह में तय करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने अधिशासी अभियंता कानपुर विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया है कि याची से दस्तावेजी साक्ष्य लेकर यह फैसला ले कि शांति देवी और सुख देवी एक ही है. यह आदेश जस्टिस मंजू रानी चौहान ने शांति देवी उर्फ सुख देवी की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है.
याची के पति सीताराम कंपनी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे. सेवाकाल में उनकी मौत हो गई. Wife याची ने सेवानिवृत्त परिलाभो सहित पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी आदि के भुगतान की अर्जी दी. जिसे यह कहते हुए देने से इंकार कर दिया कि याची (Wife) ने शांति देवी के नाम से अर्जी दी है और सर्विस बुक में wife का नाम सुख देवी नामित है.
याची (wife) ने हलफनामा दिया कि दोनों एक ही है. पति के पैन आधार कार्ड में शांति देवी लिखा है. पति ने 2018 में Wife का नाम संशोधित करने की अर्जी दी थी. जिस पर आदेश नहीं किया गया. नाम सुधार नहीं किया गया.
कोर्ट ने कहा कंपनी को याची (wife) के पति से दस्तावेज मांगने चाहिए थे. ऐसा नहीं किया और पांच साल तक अर्जी पर कोई निर्णय नहीं लिया. विपक्षी याची के पति को नोटिस जारी करने में विफल रहे, नाम संशोधित न कर अनावश्यक परेशानी खड़ी की. कोर्ट ने आवश्यक दस्तावेज लेकर निर्णय लेने का निर्देश दिया है.
नगर पालिका गाजीपुर का contract employees को नियमित करने का आदेश वैध

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगरपालिका परिषद गाजीपुर के अधिशासी अधिकारी के लंबे समय से कार्यरत 33 चतुर्थ श्रेणी contract employees (दैनिक/संविदा कर्मचारियों) को नियमित करने के आदेश 7 अगस्त 13 को वैध करार दिया है और इस पर रोक लगाने के पालिका अध्यक्ष के आदेश 22 अगस्त 13 को अवैध करार देते हुए रद कर दिया है. सभी याची कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी का समस्त परिलाभो सहित नियमित वेतन भुगतान भुगतान करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रमुख सचिव स्थानीय निकाय, डायरेक्टर स्थानीय निकाय, नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी को भेजने का भी आदेश दिया है. यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर ने जवाहरलाल शर्मा व 32अन्य कर्मचारियों की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव ने बहस की.
याचीगण 1998 से लेकर 2004 तक पंप आपरेटर, ट्रैक्टर ड्राइवर, पाइप लाइन खलासी आदि स्वीकृत चतुर्थ श्रेणी पदों के विरूद्ध दैनिक/संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं. अधिशासी अधिकारी ने इनकी लंबी सेवा एवं चतुर्थ श्रेणी के 187 पद खाली होने के आधार पर सभी को नियमित कर दिया. जिस पर अध्यक्ष ने पुनर्विचार करने के नाम पर रोक लगा दी. जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी.
कोर्ट ने कहा अधिशासी अधिकारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का नियुक्ति अधिकारी हैं. लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित कर उसने सही किया.इसपर रोक लगाने का आदेश सही नहीं है.
अशरफ की wife जैनब फातिमा की याचिका पर सुनवाई 27 को
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी अशरफ की wife जैनब फातिमा की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख लगाई है. यह आदेश जस्टिस अवनीश सक्सेना ने वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी और अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल को सुनकर दिया है.
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