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’20 साल के युवक को life imprisonment की सजा दे देंगे तो सुधार का मौका कहां मिलेगा’

दहेज हत्या व उत्पीड़न में पति की उम्रकैद की सजा 10 साल में तब्दील, सास को दस साल की सजा रद

'20 साल के युवक को life imprisonment की सजा दे देंगे तो सुधार का मौका कहां मिलेगा'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि 20 साल की उम्र में अपराध करने वाले युवक को life imprisonment (आजीवन कारावास) की सजा दे दी गई तो उसे खुद को सुधारने का मौका नहीं मिलेगा. खास बात यह है कि दहेज हत्या में आजीवन कारावास (life imprisonment) ही अधिकतम सजा है. इस कमेंट के साथ दो जजों की बेंच ने आरोपित पति की सजा (life imprisonment) को दस साल में तब्दील कर दिया. चूंकि वह 14 साल के करीब जेल में रह चुका है तो उसे कोर्ट ने तत्काल रिहा करने का भी आदेश दिया है. कोर्ट ने इसी मामले में मृतका की सास को सुनायी गयी दस साल कैद की सजा को भी रद कर दिया है.

दहेज हत्या के आरोपितों को यह सजा सत्र न्यायालय गाजियाबाद से मिली थी. यह आदेश जस्टिस राजीव गुप्ता तथा जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने दहेज उत्पीड़न व हत्या के आरोपियों की जेल अपील को आंशिक व पूर्ण रूप से स्वीकार करते हुए दिया है. जेल अपील पर अधिवक्ता अश्वनी कुमार ओझा ने बहस की. मामले के तथ्यों के अनुसार आरोपित चंद्रपाल उर्फ रचित की शादी ज्योति नाम की युवती के साथ 11 अक्टूबर 10 को हुई थी. 12 मार्च 2011 को संदिग्ध हालात में ज्योति की मौत हो गयी.

घटना के बाद मृतका के परिवार के लोग मौके पर नहीं मिले. इस मामले में मृतका के मायकेवालों की तरफ से दहेज के लिए हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज करायी गयी और कहा किया गया कि दहेज में मांगे गये दो लाख रुपये न दे पाने के कारण बेटी की हत्या कर दी गयी है. रिपोर्ट रमेश चंद्र की तरफ से एफआईआर गा​जियाबाद जिले के मसूरी थाना में दर्ज करायी गयी थी. इसमें मृतका के पति के अलावा, उसके जेठ, सास और जेठानी को नामजद कया गया था.

सत्र अदालत ने पति को life imprisonment व सास को दस साल सजा सुनाई

पुलिस ने विवेचना के दौरान जेठ और जेठानी को घटना में शामिल न होना पाया. इसके आधार पर पुलिस ने विवेचना के बाद पति और सास के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. अपर सत्र अदालत ने पति चंद्र पाल को अन्य सजा के साथ उम्रकैद (life imprisonment) व जुर्माने की सजा तो सास को अन्य सजा के साथ दस साल की अधिकतम सजा सुनाई.

28 मार्च 12 के सजा के फैसले को जेल अपील के माध्यम से चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट ने कहा पति को हत्या के आरोप में सजा नहीं दी गई है. दहेज हत्या के आरोप में उम्रकैद (life imprisonment) की सजा सुनाई गई है जो अधिकतम सजा है. आरोपी घटना के समय 20 साल का था. अधिकतम सजा (life imprisonment) से उसे सुधरने का अवसर नहीं मिलेगा.

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के हवाले से कहा कि अक्सर झूठे दहेज के केस दर्ज हो रहे हैं. सास के खिलाफ सामान्य प्रकृति के आरोप है. जेठ जेठानी को पुलिस ने ही छोड़ दिया था. हाईकोर्ट ने सास को भी बरी कर दिया. केवल पति को सजा सुनाई. जिसे उम्रकैद से घटाकर दस साल कर दी.

क्योंकि अभियुक्त पति चंद्र पाल उर्फ रचित ने 14 साल जेल में बताये हैं इसलिए उसे तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने सास अतरकली को मिली दस साल की कैद की सजा रद कर दी है. वह जमानत पर हैं.कोर्ट ने बंधपत्र को भी उन्मोचित करने का आदेश दिया.

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