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दिवंगत माफिया Atiq Ahmad का बहनोई पूर्व एसीएमओ डॉ अखलाक समेत 4 की Bail Application नामंजूर

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उमेश पाल हत्याकांड में चार आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज की

दिवंगत माफिया Atiq Ahmad का बहनोई पूर्व एसीएमओ डॉ अखलाक समेत 4 की Bail Application नामंजूर

दिवंगत माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmad) के बहनोई पूर्व एसीएमओ डॉ अखलाक अहमद व तीन अन्य की नामंजूर कर दी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उमेश पाल हत्याकांड में माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmad) के बहनोई डॉ अखलाक, वकील विजय मिश्र, नौकर और ड्राइवर की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. यह आदेश जस्टिस शेखर कुमार यादव ने शुक्रवार को दिया. कोर्ट ने 29 अक्टूबर को सुनवाई के बाद इन जमानत अर्जियों (Bail Application) पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था.

प्रयागराज में यह सनसनीखेज हत्याकांड फरवरी 2023 में सामने आया था जब सरेआम बम और गोलियों से मारकर अधिवक्ता उमेश पाल की हत्या कर दी गयी थी. इस घटना में उनके गनर की भी मौत हुई थी. घटना को अंजाम देने में अतीक (Atiq Ahmad) का बेटा भी शामिल था. अतीक की पत्नी भी इस मामले में नामजद आरोपित है. घटना के बाद से ही वह फरार चल रही है. इस घटना की विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला था कि मेरठ निवासी अतीक के बहनोई डॉ अखलाक अहमद ने हत्याकांड को अंजाम देने वाले अतीक के बेटे समेत कई अन्य को शरण दी थी.

इससे सबसे महत्वपूर्ण नाम बमबाज गुड्डू मुस्लिम का भी शामिल था. डॉ अखलाक उस वक्त एसीएमओ के तौर पर तैनात थे. अधिवक्ता विजय मिश्र समेत अन्य पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है. Atiq Ahmad के बहनोई डॉ अखलाक की जमानत के समर्थन में कहा गया था कि उसे रिश्तेदार होने के कारण फंसाया जा रहा है जबकि अन्य ने भी खुद को निर्दोष बताया था. हत्याकांड के बाद से फरार बमबाज गुड्डू मुस्लिम पांच लाख का इनामी है.

पुलिस का दावा है कि घटना को अंजाम देने के बाद उसने डॉ अखलाख के मेरठ स्थित आवास में शरण ली थी. मेरठ से गिरफ्तार अखलाक ने जमानत पर रिहाई के लिए सितम्बर 2023 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. डॉ अखलाक के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि वह पेशे से डॉक्टर है और एफआईआर में नामजद नहीं है. अपराध की दुनिया से उसका कोई वास्ता नहीं है. उसे केवल अतीक के रिश्तेदार होने के कारण फंसाया गया है. राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया.

Atiq Ahmad के वकील होने के कारण फंसाया जा रहा

Atiq Ahmad  के वकील विजय मिश्र पर उमेश पाल हत्याकांड में मुखबिरी करने का आरोप है. विजय मिश्र की गिरफ्तारी लखनऊ से हुई थी. जमानत पर रिहाई की मांग करते हुए उनकी अधिवक्ता मंजू सिंह ने दलील दी थी कि उन्हें Atiq Ahmad के वकील होने के कारण फंसाया जा रहा हैं. इसी तरह कैश व नियाज की ओर से भी बेगुनाह होने की दलीलें दी गई. उनके अधिवक्ता ने कहा था कि कैश ड्राइवर था जबकि काफी समय पहले से नौकरी छोड़ चुका था. उसका कोई अपराधिक इतिहास नहीं है.

नियाज के वकील ने भी उसे बेकसूर बताया था. कहा था कि उसका घटना से कोई सरोकार नहीं है. उसके पास से की बरामदगी नहीं है, न ही वह एफआईआर में नामजद है. उमेश पाल की पत्नी जया पाल के अधिवक्ता प्रवीण पांडेय, सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा था कि सभी आरोपी हत्याकांड में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं.

कोर्ट को जानकारी दी गयी कि अभी तक ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. मौजूदा समय में अतीक की इनामी बीवी शाइस्ता परवीन, अशरफ की बीवी जैनब व बमबाज गुड्डू मुस्लिम समेत कुल सात अन्य आरोपी फरार हैं. ऐसे में उनकी रिहाई से लंबित ट्रायल प्रभावित होगा.

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