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प्रदेश में बंदरों की Problem का समाधान 4 सप्ताह में खोजे सरकार

प्रदेश में बंदरों की Problem का समाधान 4 सप्ताह में खोजे सरकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बंदरों की Problem के समाधान की कार्य योजना तैयार करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है. यह आदेश चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने गाजियाबाद निवासी छात्रा प्राजक्ता सिंघल और समाजसेवी विनीत शर्मा की जनहित याचिका पर अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ को सुनकर दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को बंदरों की Problem के समाधान के लिए याची की ओर से प्रस्तावित कार्ययोजना पर विचार करने का निर्देश दिया है.

योजना तैयार करते समय भारतीय पशु कल्याण बोर्ड और राज्य पशु कल्याण बोर्ड से भी परामर्श करने को कहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बंदरों पर किसी प्रकार की क्रूरता न हो. अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने सुनवाई के दौरान राज्यभर में बंदरों की Problem से निपटने के लिए प्रस्तावित कार्य योजना प्रस्तुत की.

Problem से निपटने के लिए प्रस्तावित कार्य योजना प्रस्तुत की

साथ ही कोर्ट को बताया कि सरकार को नगर पालिका परिषद मोदीनगर द्वारा तैयार प्रारूप और योजना पर भी विचार करना चाहिए, जिसे कुछ शर्तों के साथ अपनाया जा सकता है. इससे पूर्व कोर्ट ने प्रमुख सचिव शहरी विकास को नगर निगम अधिनियम और उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के अनुसार स्थानीय निकायों को उनकी जिम्मेदारी पूरा करने का आदेश देने का निर्देश दिया था.

सरकारी वकील ने बताया कि वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों के साथ प्रारंभिक बैठक आयोजित की गई है. मुद्दे को नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है व कई अन्य विभागों से संबंधित है इसलिए इसमें कुछ समय लगने की संभावना है.

राज्य सरकार ने कार्ययोजना के लिए दो महीने का समय मांगा लेकिन कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने अपेक्षा की है कि सरकार इस पहलू को ध्यान में रखते हुए विषय वस्तु पर विचार करेंगे. याचिका पर अगली सुनवाई के लिए तीन दिसंबर की तारीख लगाई गई है.
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