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Minorities को शैक्षणिक संस्थान स्थापित और उनका प्रबंधन करने के अधिकार की गारंटी देने वाले संविधान के अनुच्छेद 30(1) का दुरुपयोग उचित नियमों से छूट का दावा करने के लिए नहीं किया जा सकता

इलाहाबाद HC ने मदरसा प्रबंधक गोरखपुर का विज्ञापन रद्द किया

Minorities को शैक्षणिक संस्थान स्थापित और उनका प्रबंधन करने के अधिकार की गारंटी देने वाले संविधान के अनुच्छेद 30(1) का दुरुपयोग उचित नियमों से छूट का दावा करने के लिए नहीं किया जा सकता

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अल्पसंख्यकों (Minorities) को शैक्षणिक संस्थान स्थापित और उनका प्रबंधन करने के अधिकार की गारंटी देने वाले संविधान के अनुच्छेद 30(1) का दुरुपयोग उचित नियमों से छूट का दावा करने के लिए नहीं किया जा सकता. इस कमेंट के साथ कोर्ट ने मदरसा अरबिया शमशुल उलूम सिकरीगंज (एहता नवाब) गोरखपुर (Minorities शैक्षणिक संस्थान) के नाजिमे आला/प्रबंधक द्वारा सहायक अध्यापकों और लिपिक के चयन के लिए जारी विज्ञापन को रद्द कर दिया है.

याचिकाकर्ताओं (Minorities शैक्षणिक संस्थान) ने मदरसा अरबिया शमशुल उलूम सिकरीगंज (एहता नवाब) गोरखपुर में सहायक अध्यापक तहतानिया के 5 पदों और लिपिक के 1 पद के चयन के लिए नाजिम आला/प्रबंधक (चौथे प्रतिवादी) द्वारा जारी विवादित विज्ञापन को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

“भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30(1) निस्संदेह अल्पसंख्यकों (Minorities) को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रबंधन करने का अधिकार देता है; हालाँकि, इस अधिकार का दुरुपयोग शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने और शिक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए बनाए गए उचित नियमों से छूट पाने के लिए नहीं किया जा सकता.”
जस्टिस मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद कहा

अंजुमन इस्लामियां अरबिया शम्सुल उलूम विलेज के नाम से एक सोसाइटी मदरसा अरबिया शम्सुल उलूम सिकरीगंज (एहता नवाब) गोरखपुर नामक एक शैक्षणिक संस्थान (Minorities शैक्षणिक संस्थान) चलाती है. सोसाइटी (Minorities शैक्षणिक संस्थान) की प्रबंध समिति के अंतिम चुनाव वर्ष 2014 में हुए थे, जिसमें दूसरे याचिकाकर्ता को सरपरस्त चुना गया था.

इसके बाद सोसाइटी में विवाद उत्पन्न हो गया और सोसाइटी की प्रबंध समिति को कालातीत घोषित कर दिया गया. तीसरे प्रतिवादी को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 की धारा 25(2) के तहत चुनाव कराने का निर्देश दिया गया.

मामला यह था कि सज्जाद हुसैन सोसाइटी के सदस्य नहीं थे और 2017 और 2018 में हुए चुनाव अवैध थे. किसी भी याचिका में कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया और तीनों याचिकाएं खारिज कर दी गईं. तीसरे प्रतिवादी ने चुनाव कार्यक्रम घोषित किया, लेकिन चुनाव नहीं हो सका. बाद में, ईद मोहम्मद को अन्य पदाधिकारियों के साथ नाज़िम-ए-आला/प्रबंधक चुना गया.

वर्ष 2022-2023 के लिए प्रबंध समिति की सूची दर्ज की गई. दूसरे याचिकाकर्ता ने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका दायर की, लेकिन अभियोजन के अभाव में उसे खारिज कर दिया गया.

20 मई, 2025 के एक सरकारी आदेश के अनुसार, मदरसा में शिक्षकों के चयन के बारे में एक निर्देश जारी किया गया था, जिसके अनुसरण में निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, उत्तर प्रदेश द्वारा एक पत्र जारी किया गया था जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि मदरसा में नियुक्तियां करते समय सरकार द्वारा जारी निर्देश का कड़ाई से पालन किया जाना था.

उपरोक्त के बावजूद, प्रतिवादी (Minorities शैक्षणिक संस्थान) ने सहायक अध्यापक तहतानिया और क्लर्क के 1 पद का विज्ञापन दिया. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि जब संबंधित अधिकारियों द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णय के मद्देनजर 20 मई, 2025 को एक सरकारी आदेश जारी किया गया था, तो ऐसे संस्थानों में शिक्षकों की पात्रता और योग्यता के संबंध में नियमों और शर्तों के अंतिम रूप देने तक नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई थी, चौथे प्रतिवादी को, जो सोसायटी का सदस्य भी नहीं था, विज्ञापन जारी करने का कोई अधिकार नहीं था.

Minorities शैक्षणिक संस्थान ने सहायक अध्यापक तहतानिया और क्लर्क पद का विज्ञापन दिया

बेंच ने कहा, कोई भी व्यक्ति जिसकी नियुक्ति उपरोक्त विज्ञापन के अनुसार की गई थी, ऐसी अवैध नियुक्ति पर किसी कानूनी अधिकार का दावा नहीं कर सकता. कहा कि उचित नियमों से छूट का दावा करने के लिए अनुच्छेद 30(1) का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. मदरसा शिक्षकों (Minorities शैक्षणिक संस्थान) की योग्यता के मानक तय करने के लिए सरकार का इंतजार किए बिना विज्ञापन जारी करना कानून की नजर में गलत है और उपरोक्त अनुच्छेद का उल्लंघन है.

कोर्ट ने पाया कि चौथे प्रतिवादी ने सरकारी नीति और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्देशों का उल्लंघन करते हुए विज्ञापन जारी किया था. जिसके अनुसार संस्थानों के प्रधानाचार्य और प्रबंधक को पहले ही दिशानिर्देश, निर्देश, पत्र और नोटिस जारी किए जा चुके थे. जिनमें उन्हें योग्यता और पात्रता से संबंधित नियमों और विनियमों के अंतिम रूप देने तक कोई भी नई नियुक्ति करने से रोक दिया गया था.

आदेश में कहा गया मदरसा अरबिया शम्शुल उलूम सिकरीगंज (एहता नवाब) गोरखपुर (Minorities शैक्षणिक संस्थान) में सहायक अध्यापक तहतानिया के 05 पदों और क्लर्क के 01 पद के चयन के लिए नाजिम-ए-आला/प्रबंधक (प्रतिवादी संख्या 4) द्वारा दैनिक समाचार पत्र गोरखपुर में 29.04.2025 को प्रकाशित कराया गया विज्ञापन रद्द किया जाता है.

याचिका को स्वीकार करते हुए, पीठ ने स्पष्ट किया कि भले ही व्यक्तियों को एक ऐसे विज्ञापन के अनुसार नियुक्त किया गया हो जो अपने आप में अवैध है, उन्हें सुनवाई का कोई अधिकार नहीं है और जब उनका चयन एक ऐसे विज्ञापन के अनुसार किया गया है जो अवैध रूप से जारी किया गया है और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के मद्देनजर लिए गए नीतिगत निर्णय के विरुद्ध है, तो वे कोई आपत्ति नहीं उठा सकते.

Case : Committee Of Management Madarsa Arabiya Shamshul Uloom Sikariganj Ehata Nawab v. State Of U.P.

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