कोर्ट के बैठने में देरी की पूर्व सूचना देने की मांग वाली PIL खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अधिवक्ता की भ्रमित होकर दाखिल निरर्थक PIL (जनहित याचिका) खारिज कर दी है और कहा है कि जिसका कोई विधिक आधार नहीं ऐसी मांग पूरी करने के समादेश जारी करने की मांग की गई है. PIL में जिस प्रत्यावेदन को तय करने का समादेश मांगा गया है, वह वैधानिक नहीं है. यह आदेश जस्टिस एसडी सिंह और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ल की बेंच ने अधिवक्ता अरूण मिश्र की PIL (जनहित याचिका पर) दिया है.
याची का कहना था कि उसने एक सितंबर 25 को पत्र लिखकर मांग की है कि कोर्ट यदि देरी से बैठ रही हो तो इसकी सूचना काजलिस्ट में प्रकाशित हो या कोर्ट के बोर्ड पर दी जाय. जो सभी के लिए लाभकारी होगी. याचिका (PIL) में पत्र पर विचार करने का समादेश जारी करने की मांग की गई थी. हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने याचिका पर आपत्ति की.
कहा याची ने तथ्यों की विधिक जांच किए बगैर याचिका (PIL) दायर की है. जिस पर अनुच्छेद 226 की अंतर्निहित शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता जो प्रार्थना की है उसके लिए समादेश जारी ही नहीं किया जा सकता है.
बिना कौड़ी हर्जाना लगायें जनहित याचिका (PIL) खारिज
पत्र वैधानिक उपबंधो के तहत नहीं दिया गया है. कोर्ट ने कहा याची स्वयं वकील हैं और व्यक्तिगत हलफनामा दिया है किन्तु पैरा 6 व 7 मिली सूचना के आधार पर हलफ किया गया है. कोर्ट ने बिना कौड़ी हर्जाना लगायें जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी.
वीडीओ को सस्पेंड करने वाले ADDO बागपत तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बागपत के सहायक जिला विकास अधिकारी (ADDO) को अवमानना मामले मे तलब किया है. कोर्ट ने ग्राम विकास अधिकारी प्रेम कुमार के निलंबन के खिलाफ याचिका पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मूल रिकॉर्ड पेश न किए जाने पर नाराजगी जताई. साथ ही सीजेएम बागपत को सहायक जिला विकास अधिकारी (ADDO) की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस विकास बुधवार ने प्रेम कुमार की याचिका पर दिया है.
विकास खंड बड़ौत के वीडीओ प्रेम कुमार के खिलाफ ग्राम प्रधान गूंगाखेड़ी ने अनियमितता की शिकायत की थी. डीडीओ बागपत ने शिकायतों के आधार पर प्रेम कुमार को निलंबित कर विभागीय जांच संस्थित कर दी. जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर डीडीओ ने प्रेम कुमार की वर्ष 2025-26 की वेतन वृद्धि स्थायी रूप से रोक दी.
इस आदेश को प्रेम कुमार ने याचिका दाखिल कर चुनौती दी. याचिका में कहा गया कि याची को पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और उक्त दंडादेश दिया गया, जो नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन है. हाईकोर्ट ने गत 26 मई को विभागीय कार्यवाही का मूल रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया था. स्थायी अधिवक्ता के कई बार सूचना देने के बाद भी मूल रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया.
कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए को सहायक जिला विकास अधिकारी (ADDO) बागपत को मूल रिकॉर्ड के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया. इस आदेश का भी अनुपालन नहीं होने पर कोर्ट ने सीजेएम बागपत को सहायक जिला विकास अधिकारी (ADDO) की मूल रिकॉर्ड के साथ उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया.
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