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सौतन पर खौलता तेल फेंकने वाली Lady को हाई कोर्ट से जमानत

महराजगंज की घटना, जेल को बेल आर्डर मेल करने का निर्देश

सौतन पर खौलता तेल फेंकने वाली Lady को हाई कोर्ट से जमानत

पति की सम्पत्ति पर हक जताते हुए विवाद करने वाली दूसरी पत्नी पर खौलता हुआ तेल फेंककर झुलसा देने वाली महिला (Lady) श्रीमती अंजलि देवी की जमानत इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंजूर कर ली है. कोर्ट ने प्रकरण में चार्जशीट दाखिल हो जाने और आरोपित के महिला (Lady) होने के आधार पर सशर्त जमानत मंजूर की है. यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के बाद दिया है. कोर्ट ने जल्द रिहाई सुनिश्चित करने के लिए बेल की कापी मेल से जेल को भेजने का निर्देश दिया है.

यह प्रकरण यूपी के महराजगंज जिले के चौक थाना क्षेत्र का है. यह घटना 2023 में सामने आयी थी. इस मामले में चौक थाने में मुकदमा अपराध संख्या 67/2025, धारा-118(2), 352 भादवि, 2023 दर्ज कराया गया था. आरोपित महिला जेल में है. जिला स्तर पर जमानत का आवेदन खारिज होने के बाद आरोपित महिला (Lady) ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

जमानत के लिए आवेदन करने वाली महिला (Lady) का पक्ष रखते हुए उसके अधिवक्ता ने कहा कि वह रमाशंकर की पहली पत्नी है जबकि घायल कथित तौर पर रमाशंकर की दूसरी पत्नी है. उनकी तरफ से कहा गया कि रमाशंकर के दूसरी शादी करने की जानकारी उसे नहीं थी. घटना के संबंध में दर्ज करायी गयी रिपोर्ट के अनुसार घटना के दिन झुलसी महिला (Lady) खुद रमाशंकर के घर पहुंची थी. घायल महिला (Lady) के बयान के अनुसार वह अपने पति की सम्पत्ति पर अपना अधिकार चाहती थी.

इसी को लेकर दोनों पत्नियों के बीच हुई गरमागरम बहस हुई. गुस्से में आकर आवेदक द्वारा घायलों पर कथित रूप से गर्म तेल डाल दिया गया. आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि घायलों को चोट पहुँचाने का उसका कोई पूर्व-नियोजित इरादा नहीं था. जो कुछ भी हुआ वह दोनों पत्नियों के बीच हुई गरमागरम बहस के दौरान क्षणिक आवेश में हुआ.

यह भी दलील दी गई कि मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया जा चुका है इसलिए हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं रह गयी है. आवेदक कानून का पालन करने वाली नागरिक है और वह 24 मार्च 2025 से जेल में बंद है. भरोसा दिलाया गया कि जमानत मिल जाने पर वह जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगी और मुकदमे की कार्यवाही में सहयोग करेगी.

सरकारी की तरफ से एजीए ने जमानत की प्रार्थना का विरोध किया. आवेदनकर्ता के वकील की दलील पर विचार करते हुए और यह ध्यान में रखते हुए कि आवेदक एक महिला (Lady) है और अपराध की प्रकृति, साक्ष्य, अभियुक्त की संलिप्तता को ध्यान में रखते हुए और मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना कोर्ट ने आवेदक को जमानत पर रिहा किए जाने का हकदार माना.

कोर्ट ने आवेदक Lady श्रीमती अंजलि देवी को संबंधित न्यायालय की संतुष्टि हेतु व्यक्तिगत बंधपत्र एवं समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और कुछ शर्तें भी जोड़ीं. आवेदक (Lady) मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा जिससे वह न्यायालय या किसी पुलिस अधिकारी को ऐसे तथ्य बताने से विमुख हो जाए या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करे.

  • आवेदक बिना किसी स्थगन की मांग किए, परीक्षण/जांच में ईमानदारी से सहयोग करेगा.
  • जमानत पर रिहा होने के बाद किसी भी आपराधिक गतिविधि या किसी भी अपराध में शामिल नहीं होगा.
  • आवेदक (Lady) अपने द्वारा निष्पादित बंधपत्र की शर्तों के अनुसार उपस्थित होगा.
  • किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में यह जमानत रद्द करने का आधार होगा.
  • बंधपत्र स्वीकार किए जाने से पहले आवेदक और जमानतदारों की पहचान, स्थिति और निवास प्रमाण संबंधित न्यायालय द्वारा सत्यापित किए जाएँगे.

कोर्ट ने कहा कि आवेदक को इस आदेश की कंप्यूटर जनित प्रति के आधार पर रिहा किया जाएगा, जिसे उच्च न्यायालय इलाहाबाद की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जाएगा और संबंधित वकील द्वारा सत्यापित किया जाएगा, इस वचनबद्धता के साथ कि प्रमाणित प्रति 15 दिनों के भीतर दाखिल की जाएगी.

आवेदक Lady का बेल आर्डर वेबसाइट से डाउनलोड किया जाएगा

यह भी निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट आवेदक की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने के लिए जमानत आदेश प्रबंधन प्रणाली (बीओएमएस) के माध्यम से संबंधित जेल को रिहाई आदेश भेजेगा. कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि वे जमानत देने के लिए नीति रणनीति के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में इस आदेश की एक प्रति ई-मेल या ई-जेल पोर्टल के माध्यम से संबंधित जेल को भेजें.

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