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नजूल भूमि को freehold करने के समादेश का पालन करने का निर्देश

हाई कोर्ट ने कहा, एक माह में आदेश का पालन करें या 20 नवंबर को हाजिर हों डीएम

नजूल भूमि को freehold करने के समादेश का पालन करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने DM, ADM और अपर मुख्य सचिव हाउसिंग विभाग को याची की सिविल लाइंस स्थित नजूल  भूमि को freehold करने के समादेश का एक माह में पालन करने का निर्देश दिया है और कहा कि अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं करने पर तीनों अधिकारी 20 नवंबर को हाजिर होंगे. कोर्ट ने कहा कोर्ट का आदेश पहले ही पारित किया जा चुका था बाद में नजूल भूमि को freehold करने को निलंबित रखने का अध्यादेश जारी किया गया. यह अध्यादेश कोर्ट के समादेश को प्रभावित नहीं करेगा.

कोर्ट ने कहा सरकार किसी की freehold अर्जी निरस्त व किसी की लंबित रखकर समानता के अनुच्छेद 14 के मूल अधिकारों का मनमाने तरीके से हनन नहीं कर सकती. यह आदेश जस्टिस सलिल कुमार राय ने डा अशोक तेहिलियानी की अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.

याची का कहना है कि नजूल भूमि 2(ए) 10 सिविल लाइन प्रयागराज के मूल पट्टेदार ने 8 मार्च 1972 को उसके पिता डा नंदलाल तेहिलियानी के नाम विक्रय करार किया था जो पंजीकृत नहीं किया जा सका. सारे अधिकार सहित भूमि पर कब्जा दे दिया गया जो आज भी बरकरार है. शर्त थी कि बिना सरकार की अनुमति नजूल जमीन बेची नहीं जा सकती. इसलिए बैनामा नहीं किया जा सका. याची के पिता ने सरकार से अनुमति मांगी थी. 1991 में सरकार की नजूल को freehold की नीति लागू हुई.

कोर्ट ने सरकार का आदेश रद करते हुए याची के पक्ष में निर्धारित राशि लेकर भूमि freehold करने का आदेश दिया

याची ने 30 जनवरी 99 को अर्जी दी. 25 अगस्त 06 को यह कहते हुए अर्जी निरस्त कर दी कि विक्रय करार पंजीकृत नहीं था.इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. कोर्ट ने सरकार का आदेश रद करते हुए याची के पक्ष में निर्धारित राशि लेकर भूमि फ्रीहोल्ड करने का आदेश दिया. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सरकार की एसएलपी खारिज हो गई. पुनर्विचार अर्जी भी निरस्त हो गई

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इसी बीच अध्यादेश आया जिसमें नजूल को freehold स्कीम निलंबित कर दी गई. विधेयक सदन से पारित होने के बाद सेलेक्ट कमेटी में लंबित है. आदेश का पालन करने की मांग में अवमानना याचिका दायर की गई. सरकार ने तर्क दिया कि फ्रीहोल्ड कराना किसी का विधिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा हाईकोर्ट के समादेश पर अध्यादेश जो सीज हो चुका है, प्रभावी नहीं होगा. अधिकारियों को आदेश का पालन करना होगा.

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