False Recovery को रोकने के लिए है 105 BNSS, डिटेल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी करें डीजीपी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, पुलिस स्पॉट पर ही बनाये तलाशी और जब्ती की वीडियो

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बीएनएसएस की धारा 105 False Recovery को रोकने के लिए है. इसके अनुसार किसी भी अभियुक्त की गिरफ्तारी के समय ली जाने वाली तलाशी और बरामदगी की स्पाट पर वीडियोग्राफी अनिवार्य शर्त है. ऐसा न करने से अभियोजन कहानी संदेह के दायरे में आ जाती है. चोरी की बाइकों के साथ गिरफ्तार किये गये आरोपित शादाब की जमानत मंजूर करते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने डीजीपी यूपी को निर्देश दिया है कि वह 105 BNSS के तहत कार्रवाई के लिए डिटेल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी करें.
यह जमानत याचिका मुजफ्फरनगर जिले के मंसूरपुर थाना की पुलिस द्वारा आरोपित शादाब व चार अन्य के कब्जे से चोरी की 40 बाइकें बरामद (Recovery) होने से जुड़ा हुआ था. इस मामले में थाने में केस क्राइम नंबर 185/2024, धारा 305(2), 317(2) बीएनएस दर्ज है. आरोपित शादाब की तरफ से दाखिल जमानत याचिका के समर्थन में याची के समर्थन में तर्क दिया कि आवेदक का नाम एफआईआर में नहीं था.
बाद में उसे चार अन्य सह-आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया. उनके संयुक्त कब्जे से 40 मोटरसाइकिलें भी बरामद (Recovery) दिखाई गईं. पुलिस ने बरामदगी (Recovery) में किसी को निजी गवाह नहीं बनाया और न ही वीडियोग्राफी करायी.
जमानत के समर्थन में आवेदक के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सह-आरोपियों को हाई कोर्ट की अन्य बेंचों द्वारा पहले ही जमानत दी जा चुकी है. हाईकोर्ट की टिप्पणियां रिकॉर्ड देखने के बाद जस्टिस देशवाल ने पाया कि इस मामले में यूपी पुलिस मोटरसाइकिलों की बरामदगी (Recovery) या जब्ती सूची तैयार करने की कोई वीडियोग्राफी करने में विफल रही थी.
कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 105 को यूपी भारतीय नागरिक सुरक्षा नियम, 2024 के नियम 18 के साथ पढ़े जाने पर यह स्पष्ट है कि, ई-साक्ष्य ऐप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रक्रिया को रिकॉर्ड करना अनिवार्य है. ऐसा न करना न केवल पुलिस की लापरवाही बल्कि मनमानी को भी दिखाता है.
यह ऐसा फैक्ट है जिससे जब्त किये गये सामानों की बरामदगी (Recovery) के बारे में तैयारी की गयी प्रॉसिक्यूशन की कहानी संदेह के दायरे में आ जाती है. बेंच ने कहा कि तलाशी या जब्ती की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग को केस डायरी का हिस्सा बनाया जाना चाहिए और उसे 48 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट को भेजा जाना चाहिए.
बीएनएसएस धारा 105: ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से तलाशी और जब्ती (Recovery) की रिकॉर्डिंग
इस अध्याय या धारा 185 के तहत किसी स्थान की तलाशी लेने या किसी संपत्ति, वस्तु या चीज पर कब्जा (Recovery) करने की प्रक्रिया, जिसमें ऐसी तलाशी और जब्ती (Recovery) के दौरान जब्त की गई सभी चीजों की सूची तैयार करना और गवाहों द्वारा ऐसी सूची पर हस्ताक्षर करना शामिल है, को किसी भी ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से, अधिमानतः मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया जाएगा और पुलिस अधिकारी बिना किसी देरी के ऐसी रिकॉर्डिंग जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजेगा.
धारा 185(2)- पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी
उप-धारा (1) के तहत कार्रवाई करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि संभव हो, तो स्वयं तलाशी लेगा: बशर्ते कि इस धारा के तहत की गई तलाशी को ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से, अधिमानतः मोबाइल फोन द्वारा रिकॉर्ड किया जाएगा. तलाशी का स्थान जहाँ से बरामदगी (Recovery) की जानी है कि वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य है
कोर्ट ने कहा कि इस अदालत के सामने ऐसे कई मामले आए हैं जहाँ किसी वस्तु की बरामदगी (Recovery) के संबंध में स्वतंत्र गवाह नहीं मिल सके और फिर भी पुलिस द्वारा ई-साक्ष्य पोर्टल या अन्य ऑडियो, वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई, जिससे अपराधियों को जमानत के साथ-साथ ट्रायल के दौरान भी फायदा होता है.
पुलिस महानिदेशक को कोर्ट ने दिये निर्देश :-
- उत्तर प्रदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा नियम, 2024 के नियम 18(5) के अनुसार, तलाशी, जब्ती (Recovery) या संपत्ति या अन्य आपत्तिजनक सामग्री पर कब्जे की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से करने के लिए विस्तृत SOP जारी करें
- जिसमें जब्त (Recovery) की गई वस्तुओं या संपत्ति की सूची तैयार करना और साथ ही E-Sakshya पोर्टल पर गवाहों के हस्ताक्षर लेना और उसे अपलोड करना या ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन सहित अन्य ऑडियो, वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से करना शामिल है
- यह निर्देश भी जारी किया जा सकता है कि BNSS की धारा 105 के साथ पढ़े गए उत्तर प्रदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा नियम, 2024 के नियम 18 की अनिवार्य आवश्यकता का पालन न करने पर संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है
- ताकि एक तरफ यह निर्दोष व्यक्तियों को संपत्ति या वस्तुओं की बरामदगी दिखाकर झूठे फंसाने से बचाएगा और दूसरी तरफ जमानत याचिका की सुनवाई के साथ-साथ ट्रायल के दौरान अपराधियों के खिलाफ पुख्ता सबूत तैयार किए जा सके.
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