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BLO की मनमानी के खिलाफ याचिका, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार व चुनाव आयोग से कार्यवाही की जानकारी मांगी, सुनवाई 10 मार्च को

BLO की मनमानी के खिलाफ याचिका, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार व चुनाव आयोग से कार्यवाही की जानकारी मांगी, सुनवाई 10 मार्च को

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व प्रदेश चुनाव आयोग से मऊ जिले के मानाजीत ग्राम पंचायत के BLO राम प्रवेश राम के खिलाफ शिकायतों पर कृत कार्यवाही की जानकारी मांगी है और याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 10 मार्च नियत की है. कोर्ट ने कहा कि सुनवाई तिथि तक जरूरी कार्रवाई की जायेगी.

यह आदेश चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की बेंच ने मनीष कुमार की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता परवेज इकबाल अंसारी ने पक्ष रखा. इनका कहना था कि विपक्षी BLO मनमानी कर रहा है. वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की अर्जी पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.

लोगों की काफी शिकायत है. इससे पहले एक अध्यापक BLO थे वह सही काम कर रहे थे. उन्हें हटाकर राम परवेश राम को BLO नियुक्त किया गया. फिर इनके स्थान पर दूसरा BLO आया, कुछ दिन में उसे हटाकर फिर विपक्षी को बना दिया गया और शिकायत के बावजूद उसे मनमानी करने दिया जा रहा. याचिका में विपक्षी BLO को हटाने की मांग की गई है.

मेडिकल कालेज की जांच रिपोर्ट से Medical Board की जांच रिपोर्ट पर संदेह का आधार नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अपनी मर्जी से मेडिकल जांच कराकर अनुकूल रिपोर्ट पेश करने से यह नहीं कहा जा सकता कि Medical Board की जांच व पुन: जांच रिपोर्ट अविश्वसनीय है. याची द्वारा Medical Board की दो बार जांच में अनफिट करार देने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज व अस्पताल की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुनः तीसरी बार जांच कराने की मांग में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी.

यह आदेश जस्टिस विकास बुधवार की एकलपीठ ने प्रवीण कुमार की याचिका पर दिया है. याचिका पर अधिवक्ता अदितेंद्र सिंह व भारत सरकार के अधिवक्ता दीपक सिंह ने बहस की. याची पैरा मिलिट्री फोर्स में कांस्टेबल भर्ती में बैठा. मेडिकल जांच में दोनों आंखों में खामी पाई गई और अनफिट करार दिया.

दुबारा जांच में भी खामी बनी रही. तो याची ने खुद मेडिकल कॉलेज में जांच कराई कहा उसकी दाईं आंख सही है. इसलिए फिर से मेडिकल का आदेश दिया जाय. कोर्ट ने विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को अविश्वसनीयन मानते हुए याचिका खारिज कर दी.

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