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बुलंदशहर में lease आवंटन व अनुमोदन निरस्त करने का एडीएम का आदेश रद्द, 97 की याचिका स्वीकार

कृषि भूमि lease के खिलाफ पीड़ित ही कर सकता है शिकायत, बाहरी को शिकायत का अधिकार नहीं: हाईकोर्ट

बुलंदशहर में lease आवंटन व अनुमोदन निरस्त करने का एडीएम का आदेश रद्द, 97 की याचिका स्वीकार

गांव सभा के प्रस्ताव और एसडीएम के अनुमोदन से किसी लाभार्थी को आवंटित किये गये कृषि भूमि के पट्टे (lease) के खिलाफ किसी पीड़ित को ही शिकायत करने का अधिकार है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि गैर पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर की गई कार्रवाई अवैध है. इसी के साथ कोर्ट ने भूमि आवंटन (lease) व अनुमोदन को निरस्त करने के अपर कलेक्टर बुलंदशहर के आदेश 30 जून 16 व अपर आयुक्त मेरठ के द्वारा अपर कलेक्टर के आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी खारिज करने के आदेश 3 अक्टूबर 16 को विधि विरुद्ध करार देते हुए रद कर दिया है.

यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया की एकलपीठ ने बुलंदशहर, सिकंदरा तहसील के बिरौली ताजपुर के सतीस व 97 अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है. कोर्ट ने lease पीड़ित की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि पीड़ित उसे भी माना जायेगा जिसे कार्य से विधिक क्षति पहुंची हो या अनुचित तरीके से वंचित किया गया हो या उसे कुछ देने से इंकार कर दिया गया हो.

ऐसा व्यक्ति किसी कार्य के खिलाफ शिकायत कर सकता है. लेकिन यदि वह किसी भी तरह से पीड़ित नहीं है तो उसे शिकायत करने का अधिकार नहीं है. इस तरह की शिकायत को नोटिस लेकर कोई कार्रवाई भी नहीं की जानी चाहिए.

गांव सभा के प्रस्ताव से याचियों को कृषि पट्टा (lease) दिया गया

बता दें कि 20 अप्रैल 94 के गांव सभा के प्रस्ताव से याचियों को कृषि पट्टा (lease) दिया गया.जिसका अनुमोदन भी एसडीओ द्वारा कर दिया गया. गांव के ही जयपाल सहित 36 लोगों ने जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 198 (4)के तहत 29 जून 94 को कलेक्टर को शिकायत की. इस शिकायत पर दो केस दर्ज किए गए.

इसके बाद जांच की जिम्मेदारी एसडीओ को सौंपी गयी. तथ्यों की पड़ताल करने के बाद उनकी रिपोर्ट आई कि गांव सभा का प्रस्ताव उचित प्रक्रिया अपनाये बगैर lease दिया गया था. इस रिपोर्ट को संज्ञान लेते हुए एडीएम ने अर्जी स्वीकार कर ली.

एसडीएम के फैसले से नाराज पट्टा (lease) धारकों ने इसके खिलाफ आयुक्त के यहां रिवीजन  दाखिल किया. आयुक्त ने तथ्यों को परखने के बाद रिजीवन को स्वीकार कर लिया और एडीएम का आदेश समाप्त कर दिया. आयुक्त के इस फैसले के खिलाफ राजस्व परिषद में पुनरीक्षण दाखिल किया गया है. राजस्व परिषद ने तथ्यों के आधार पर आयुक्त के फैसले को सही ठहराया और पुनरीक्षण का आवेदन खारिज कर दिया.

राजस्व परिषद से भी कोई राहत न मिलने पर हाई कोर्ट में रिट दाखिल की गयी. हाई कोर्ट ने एडीएम के आदेश यह कहते हुए रद कर दिया कि जिनकी शिकायत पर कार्रवाई की गई और आदेश दिया गया वे पीड़ित नहीं थे. उन्हें शिकायत करने का अधिकार ही नहीं था.

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