Illegal detention पर हाईकोर्ट नाराज, 1 लाख रुपये का मुआवजा दिये जाने का आदेश, दोषी पुलिसकर्मियों को कोर्ट उठने तक की सजा
ट्रायल कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कानून के शासन पर सीधा प्रहार, इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता: HC

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत (illegal detention) और न्यायिक आदेशों की अवहेलना पर नाराजगी जताते हुए दोषी पुलिस कर्मियों को कोर्ट उठने तक हिरासत की सजा दी. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कानून के शासन पर सीधा प्रहार है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
न्यायालय ने कहा कि न्यायिक संस्थाओं का सम्मान हर सरकारी अधिकारी की संवैधानिक जिम्मेदारी है. यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने सानू उर्फ राशिद की जमानत अर्जी पर दिया. कोर्ट ने पुलिस अफसरों को निर्देश दिया है कि वे थानों के सीसीटीवी का निरीक्षण करें और यह सुनिश्तिच करावें कि कम से कम छह महीने तक सीसीटीवी की फुटेज डिलीट न हो.
मामला ललितपुर जिले के कोतवाली थाने का है. यह जमानत याचिका सानू उर्फ राशिद की ओर से हाई कोर्ट में दाखिल की गयी थी. सानू के परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे 14 सितंबर को हिरासत (illegal detention) में लिया लेकिन आधिकारिक गिरफ्तारी 17 सितंबर को दिखाई गई.
Illegal detention साबित करने के लिए सुनवाई के दौरान सीसीटीवी फुटेज चेक कराने का आग्रह किया

Illegal detention साबित करने के लिए सुनवाई के दौरान सीसीटीवी फुटेज चेक कराने का आग्रह किया गया. इसे संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ललितपुर द्वारा द्वारा कई बार सीसीटीवी फुटेज पेश करने का आदेश पुलिस को दिया गया परंतु थाना कोतवाली पुलिस फुटेज उपलब्ध नहीं करा सकी. पुलिस का तर्क था कि कैमरों की स्टोरेज क्षमता सीमित होने के कारण रिकॉर्डिंग स्वतः डिलीट हो गई.
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि थाना प्रभारी और विवेचक ने न्यायिक आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की. अदालत ने दोनों अधिकारियों को “कोर्ट उठने तक” हिरासत में रखने की सजा सुनाई. साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि पीड़ित को अवैध हिरासत (illegal detention) के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिसकी वसूली संबंधित अधिकारियों के वेतन से की जा सकती है. कोर्ट ने आवेदक को सशर्त जमानत देते हुए कहा कि वह बजाज फाइनेंस लिमिटेड को 15 लाख रुपये लौटाने का वचन देगा और अन्य कानूनी शर्तों का पालन करेगा.
इसके साथ ही कोर्ट पुलिस थानों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई निर्देश जारी किए. कहा कि अब जिला न्यायिक अधिकारी औचक निरीक्षण कर सकेंगे और सीसीटीवी फुटेज को कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा. साथ ही, हिरासत (illegal detention) में हिंसा या अवैध बंदी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए जिला स्तर पर मानवाधिकार न्यायालय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं.