+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

यूपी बोर्ड की Book के प्रकाशन को लेकर दायर याचिका अस्वीकार, हाई कोर्ट ने कहा भविष्य में नये टेंडर पर अवसर खुला रहेगा

यूपी बोर्ड की Book के प्रकाशन को लेकर दायर याचिका अस्वीकार, हाई कोर्ट ने कहा भविष्य में नये टेंडर पर अवसर खुला रहेगा

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद की पुस्तकों (Book) के प्रकाशन के लिए जारी निविदा को चुनौती देने वाली राजीव प्रकाशन की याचिका अस्वीकार कर दी है. यह आदेश जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की बेंच ने दिया है. बोर्ड की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने बताया कि 13 नवंबर 2025 की निविदा सूचना संख्या 247 के अनुसार निविदा पहले ही उत्तरदाता संख्या दो को आवंटित की जा चुकी है और इसके परिणामस्वरूप कार्य आदेश 31 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था. जिसके तहत पहले लॉट में कक्षा नौ तथा 12 की पुस्तकों (Book) का प्रकाशन किया गया है. यह पुस्तकें (Book) बाजार में उपलब्ध हैं.

कक्षा 11 की पुस्तकें (Book) भी अन्य प्रकाशक द्वारा उपलब्ध हैं. याची के अधिवक्ता ने इसे अस्वीकार नहीं किया, लेकिन कहा कि ऐसी शर्तें उचित नहीं हैं और जानबूझकर अच्छे इच्छुक व्यक्तियों को निविदा में आवेदन करने से रोकने के लिए शामिल की गई हैं. कोर्ट ने कहा, हमारे विचार में यदि निविदा पहले ही आवंटित की जा चुकी है और आदेश का पालन किया गया है तो इस स्तर पर याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. हालांकि, याची को भविष्य में जारी किसी नई निविदा सूचना की शर्तों को चुनौती देने की स्वतंत्रता है. कोर्ट ने याचिका रिकॉर्ड में संचित कर ली है.

डीएलएड छात्रों को अतिरिक्त अवसर पर देने पर रोक, जवाब तलब

इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने डीएलएड  छात्रों को  राहत देने से इंकार करते हुए एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें तीन बार विफल  छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के लिए‘अंतिम अतिरिक्त अवसर’ देने का निर्देश दिया गया था. जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंड पीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि नियमों से परे जाकर अतिरिक्त मौका देना वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है.

मामला 2013 से 2018 बैच के उन छात्रों से जुड़ा था, जिनका नामांकन तीन बार असफल होने पर निरस्त माना जाता है. परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने 2021-22 में कुछ छात्रों को विशेष अनुमति दी थी, जिसे अन्य छात्रों ने ‘पिक एंड चूज’ नीति बताते हुए चुनौती दी. एकलपीठ ने समानता के आधार पर राहत दी थी.

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अनुसार दो वर्षीय कोर्स अधिकतम तीन वर्ष में पूरा करना अनिवार्य है और कार्यकारी आदेश वैधानिक नियमों को शिथिल नहीं कर सकते. कोर्ट ने ‘नकारात्मक समानता’ को भी अस्वीकार करते हुए कहा कि गलत लाभ सभी को नहीं दिया जा सकता.

60 साल में सरकारी वकील को रिटायर करने के शासनादेश को दे सकते हैं चुनौती, याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला कचहरी में सरकारी वकील की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें कार्यकाल बढ़ाते जाने का समादेश जारी करने की मांग की गई थी. यह आदेश जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने अधिवक्ता धीरेंद्र कुमार त्रिपाठी की याचिका पर दिया है.

राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता ने कोर्ट में 11 दिसंबर 2010 और 29 जुलाई 2022 का शासनादेश पेश किया और कहा शासनादेश में जिला सरकारी वकीलों की अधिकतम आयु 60 वर्ष निर्धारित की गई है. इसलिए याची का नवीनीकरण नहीं किया जा सकता. इस पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी किंतु याची को शासनादेश 29 जुलाई 22 को अलग याचिका दायर कर चुनौती देने की छूट दी है.

इसे भी पढ़ें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *